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हिन्दू समाज की एकजुटता से ही दूर होंगी देश और समाज की समस्याएं - डॉ. मोहन भागवत जी

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 मुजफ्फरपुर, बिहार

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संबोधित किया। गोष्ठी में सरसंघचालक जी ने कहा कि अपना देश आगे बढ़े, दुनिया का सिरमौर बने। इसकी परिस्थिति भी बन रही है। लेकिन चुनौती भी कम नहीं है। कुछ देशों को भारत का आगे बढ़ना अच्छा नहीं लग रहा है। उन्हें अपनी दुकान बंद होने का खतरा दिख रहा है। जिससे वे आगे बढ़ने के मार्ग में बाधा खड़ी करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि डर दूर करने के आत्मनिर्भरता जरूरी आत्मनिर्भरतारता से समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में सद्भाव जरूरी है। सद्भाव नहीं रहने पर लोग आपस में लड़कर मर जाएंगे। किसी भी विदेशी शक्ति ने अपनी ताकत के बल पर हमें पराधीन नहीं किया। विदेशी शक्तियों ने हमारी फूट का लाभ उठाकर जीत हासिल की। समाज में सद्भाव रहने पर लोग सभी के सुख-दुख में शामिल होंगे, इससे समस्या अपने आप दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब अपना समाज जाग रहा है। देश भी आगे बढ़ रहा है। खंड या प्रखंड स्तर पर बैठकर समाज की समस्या दूर करने के लिए लोगों को किसी नेता का मोहताज नहीं होना होगा।

दूसरे सत्र में सरसंघचालक जी ने कहा कि समस्या बताने के साथ ही उपाय भी बताना चाहिए। आज देश सज्जन शक्ति के भरोसे चल रहा है। सज्जन लोग अपने-अपने स्तर पर समस्या दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी को और नीचे ले जाना होगा। सिर्फ व्यवस्था से समस्या दूर नहीं होगी। समाज के लोग आपस में बैठकर चिंतन करेंगे, तब समस्या से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि संघ समाज के लोगों को जागृत कर रहा है। प्रखंड स्तर पर समाज और जाति का संगठन चलाने वालों को समाज के भौतिक और नैतिक उत्थान पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संपन्न लोग ही समाज की सेवा करेंगे, ऐसा नहीं है। जिनके मन में सद्भाव आ जाएगा, वही पीड़ित और अभावग्रस्त लोगों की सेवा कर पाएगा। सबको मिलकर अभावग्रस्त, समस्या पीड़ित और जरूरतमंद की समस्या दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कई गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज के लोगों ने सरकार के सहयोग के बगैर ही अपनी समस्या दूर की। इसलिए अपने स्तर पर सभी चिंतन कर अपने-अपने यहां की समस्या दूर करें। संघ गांव और प्रखंड स्तर पर बैठक करेगा, जिसमें सभी लोग अपने-अपने जाति और बिरादरी के लोगों को भी साथ लाएं। जब सभी लोग एक साथ बैठकर समस्या पर चिंतन करेंगे तो कोई दूसरा हिन्दू समाज को नहीं तोड़ पाएगा।

जनसंख्या नियंत्रण के प्रश्न पर कहा कि हिन्दू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने रोका तो नहीं है। सरकार भी 2.1 बच्चे पैदा करने को कहती है। उन्होंने कहा कि देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है। यह हिन्दू राष्ट्र ही है। समाज में विविधता है, अलगाव नहीं है। अंग्रेजों ने अलगाव को चौड़ा कर शासन किया। उस अलगाव को दूर कर हिन्दू समाज को एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि समाज के स्वार्थ से अधिक हिन्दू समाज की एकजुटता जरूरी है। हिन्दू समाज के सभी अंग को बलिष्ठ और मजबूत बनाना होगा। देश की समृद्धि के लिए सबको एक होना होगा।विचार गोष्ठी सह संवाद में प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संगठन की ओर से किए गए काम की जानकारी दी। विभिन्न सामाजिक व जातीय संगठन के प्रमुख लोगों ने कोरोना काल में किए कार्य, गरीब बच्चियों की शादी, गरीब बच्चों की पढ़ाई लिखाई, अभावग्रस्त लोगों को भोजन कराने, अपने संगठन के माध्यम से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने आदि कार्य करने की जानकारी दी।