भीलवाड़ा, राजस्थान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष एवं विजयादशमी के पावन अवसर पर भीलवाड़ा महानगर में त्रिवेणी संगम पथ संचलन निकला। संघ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संचलन में स्वयंसेवकों का अनुशासन, संगठनात्मक एकात्मता, राष्ट्रभक्ति एवं सामूहिक शक्ति का विराट स्वरूप देखने को मिला। महानगर के तीन अलग-अलग स्थानों से प्रारंभ हुए संचलनों के संगम ने पूरे आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
महानगर संघचालक कैलाश खोईवाल ने बताया कि पथ संचलन में 90 वाहिनियों एवं 40 घोष पथकों के साथ स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। तीन अलग-अलग स्थानों से पूर्ण गणवेश में निकले स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर निर्धारित मार्गों पर आगे बढ़े। घोष की स्वर-लहरियों, अनुशासित कदमताल और सुव्यवस्थित पंक्तियों ने नगर में उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति का वातावरण निर्मित किया।
रेलवे स्टेशन पर हुआ त्रिवेणी संगम
पथ संचलन का प्रारंभ तीन अलग-अलग स्थानों से हुआ। नगर क्रमांक 5, 6 एवं 7 के स्वयंसेवक कृषि उपज मंडी से, नगर क्रमांक 3 एवं 4 के स्वयंसेवक हरी सेवा धाम से तथा नगर क्रमांक 1 एवं 2 के स्वयंसेवक राजेंद्र मार्ग विद्यालय मैदान से संचलन में निकले।
तीनों संचलन निर्धारित मार्गों से आगे बढ़ते हुए प्रातः 10:21 बजे डॉ. अंबेडकर चौराहा एवं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में एकत्रित हुए। यहां तीनों संचलनों का त्रिवेणी संगम हुआ। इसके पश्चात तीनों संचलन साझा मार्ग से आगे बढ़े तथा गोल प्याऊ चौराहे से निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग मार्गों पर निकल गए।
2.1 किलोमीटर की रिंग बनी विशेष आकर्षण
विशेष आकर्षण भीमगंज थाना से एमजी हॉस्पिटल के मुख्य द्वार के मध्य स्वयंसेवकों की लगभग 2.1 किलोमीटर लंबी रिंग का दृश्य रहा। तीनों संचलनों की सुनियोजित गति एवं परस्पर समन्वय से मार्ग पर स्वयंसेवकों की लंबी, अनुशासित पंक्तियां दिखाई दीं।
पथ संचलन के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाज बंधुओं, व्यापारियों, युवाओं, मातृशक्ति एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। अनेक स्थानों पर स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा की गई। भारत माता के जयघोष एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण में नागरिकों ने अनुशासित संचलन का अभिनंदन किया। स्वागत के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति ने आपसी आत्मीयता, सामाजिक सहभागिता और संगठन के प्रति सम्मान का भाव प्रदर्शित किया।
संचलन में सम्मिलित घोष पथकों की लयबद्ध स्वर-लहरियों के साथ स्वयंसेवकों की कदमताल ने वातावरण को विशेष प्रभावशाली बनाया। पूर्ण गणवेश में एक समान गति से आगे बढ़ते स्वयंसेवकों की पंक्तियां अनुशासन, समर्पण और सामूहिकता का संदेश देती रहीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष संगठन की सौ वर्षों की साधना, सेवा, समर्पण और राष्ट्रकार्य के प्रति प्रतिबद्धता को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भीलवाड़ा महानगर में आयोजित त्रिवेणी संगम पथ संचलन इसी भाव का प्रभावशाली प्रकटीकरण बना।



