अनोखी वैज्ञानिक उड़ान
विज्ञान हमारे दैनिक जीवन और समाज की प्रगति का मुख्य आधार है। यह हमारे जीवन को सरल बनाता है, अंधविश्वास को दूर करता है तथा चिकित्सा, परिवहन, संचार तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाकर मानव सभ्यता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करता है। विज्ञान के माध्यम से ही आज हम संचार क्रांति, चिकित्सा क्रांति, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नए-नए आयाम गढ़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे युवा राज्य है। यहाँ के युवा विज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम शोध के माध्यम से प्रदेश को विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में देश के एक अग्रणी प्रदेश के रूप में स्थापित कर अनेक कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। प्रदेश के युवा विज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। राज्य सरकार ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ तथा रिसर्च फैलोशिप जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष अनुसंधान में नए अवसर प्रदान कर रही है।
इसके अलावा, राज्य सरकार विज्ञान पार्क, साइंस सिटी और नक्षत्रशालाओं की स्थापना के जरिए युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ा रही है। वर्तमान में प्रदेश में डिप्लोमा स्तर की 184 संस्थाएँ संचालित हैं, वहीं 36 नए राजकीय पॉलिटेक्निक विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। अब तक 251 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में 286 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 1,90,064 सीटें हैं, जिनमें युवा विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें से 47 संस्थानों में महिलाओं के लिए विशेष शाखाएँ हैं तथा 12 स्वतंत्र महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं।
विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में यहाँ के युवा तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में डीप-टेक इनोवेशन प्लेटफॉर्म (U-Hub) की स्थापना तथा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ जैसी पहलों के जरिये युवाओं को नए विचारों और वैज्ञानिक शोध को व्यवसाय में बदलने के लिए सहायता मिल रही है। टाटा टेक्नोलॉजी और आईटीआई के सहयोग से युवाओं को आधुनिक उद्योगों की माँग के अनुसार ढाला जा रहा है।
विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के कई युवा वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। कुछ प्रमुख प्रेरणादायक सफल युवाओं का संक्षिप्त विवरण प्रदेश के सभी युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रेरित करेगा।
अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला: लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट हैं, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने। इन्होंने जून 2006 में भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विंग में कमीशन प्राप्त किया। आप एक कुशल कमांड लीडर और टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास अनेक विमानों को उड़ाने का 2,000 घंटे से अधिक का अनुभव है। वर्ष 2019 में इन्हें इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के लिए चुना गया था और रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठोर प्रशिक्षण मिला।
इन्होंने ऐतिहासिक Axiom Space मिशन-4 के तहत पायलट के रूप में 25 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी तथा लगभग 18 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद 15 जुलाई 2025 को सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। अंतरिक्ष मिशन के दौरान इनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और योगदान के लिए देश के सर्वाेच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया।
डॉ. ऋतु करिधाल श्रीवास्तव: उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली डॉ. ऋतु करिधाल को भारत की ‘रॉकेट वूमेन’ के नाम से जाना जाता है। ये भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की एक बेहद वरिष्ठ और प्रख्यात वैज्ञानिक हैं। बचपन से ही इन्हें अंतरिक्ष और सितारों में गहरी रुचि थी। इन्होंने भौतिकी में बीएससी और एमएससी की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स की उपाधि प्राप्त की। इनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारत का मंगलयान मिशन शामिल है, जिसमें इन्होंने डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर के रूप में कार्य किया। इन्होंने मंगलयान की ऑटोनॉमी प्रणाली को डिजाइन और निष्पादित करने में मुख्य भूमिका निभाई। चंद्रयान मिशनों में भी इनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। इन्हें अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा ‘इसरो यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है।
आशीष मिश्रा: उन्नाव, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आशीष मिश्रा युवा अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-3 में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इन्होंने चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर प्रोपल्शन सिस्टम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आशीष मिश्रा विशेष रूप से नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स और थ्रॉटलिंग वाल्वों के विकास में सहायक सदस्य रहे हैं, जो चंद्रयान-3 के लैंडिंग प्रयास के लिए महत्वपूर्ण रहे।
खुशबू मिर्जा: जब भी भारत के चंद्रयान मिशन की सफलता की चर्चा की जाएगी, तब अमरोहा की रहने वाली एवं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्जा का नाम गर्व से लिया जाएगा। साधारण परिवार से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान की ऊँचाइयों तक पहुँची खुशबू ने चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 मिशन का हिस्सा बनकर न केवल अमरोहा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह पर पानी के संकेत की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अनिल पाल: जौनपुर के बरसठी विकासखंड स्थित दतांव गाँव के निवासी अनिल पाल ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक बनकर जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। देशभर में कुल 31 चयनित अभ्यर्थियों में 16वाँ स्थान प्राप्त कर 29 वर्षीय अनिल पाल द्वारा हासिल की गई यह शानदार सफलता ग्रामीण क्षेत्र के हर संघर्षरत युवा के लिए एक महान प्रेरणा है।
मुकेश वर्मा: जुलाई 2024 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के एक सामान्य किसान परिवार के युवक मुकेश वर्मा का चयन भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक सहायक के पद पर हुआ है। इन्होंने ओबीसी वर्ग में ऑल इंडिया 45वीं रैंक प्राप्त की है। इसके अलावा, BARC के आधिकारिक तकनीकी प्रशासन में वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों के लिए मुकेश कुमार वर्मा का नाम उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में मिलता है।
वैश्विक शोध और नवाचार
डॉ. योगेश्वर नाथ मिश्रा: आजमगढ़ के एक सामान्य किसान परिवार से संबंध रखने वाले डॉ. मिश्रा बचपन से ही कुशाग्रबुद्धि के छात्र रहे हैं। इनके पिता ने पूरे प्रयास से इन्हें पढ़ाया, जिसके लिए उन्हें खेती की जमीन भी बेचनी पड़ी। ऐसे विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ. मिश्रा ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और नासा की टीम के साथ मिलकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
इन्होंने दुनिया की सबसे तेज लेजर इमेजिंग टेक्नोलॉजी विकसित करने में बड़ा योगदान दिया है। इन्होंने दुनिया का सबसे तेज कैमरा बनाया। वर्तमान में आप नासा की नौकरी छोड़कर देश सेवा के लिए तत्पर हैं और आईआईटी जोधपुर में कार्यरत हैं। इनका लक्ष्य भारत को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाना तथा यहाँ एक विश्वस्तरीय लैब बनाना है।
डॉ. गौरव कुमार मिश्रा: डॉ. गौरव कुमार मिश्रा लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में एक युवा वैज्ञानिक हैं, जो एक प्रसिद्ध लाइकेनोलॉजिस्ट हैं। आपने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी एवं एमएससी की शिक्षा प्राप्त की है। इन्हें लाइकेन वर्गीकरण, जैव विविधता और पर्यावरण निगरानी के क्षेत्र में इनके उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए प्रतिष्ठित SIRE फेलोशिप के लिए जाना जाता है।
राहुल सिंह: मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इस युवा नवप्रवर्तक (Innovator) ने लगातार तीन बार इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल किया। इन्होंने कम उम्र में ही बिना चार्जिंग की बैटरी चालित ट्रैक्टर, इको-फ्रेंडली साइकिल और छोटे ड्रोन जैसी बेहतरीन स्वदेशी तकनीक विकसित की।
उत्तर प्रदेश में विज्ञान और शोध का भविष्य बहुत तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीप-टेक स्टार्टअप्स और आधुनिक डेटा केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर में नए U-Hub तथा शोध पीठों की स्थापना से युवाओं को तकनीकी शिक्षा, रोजगार और अनुसंधान के लिए नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सरकार विज्ञान अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों को 10 लाख से 20 लाख रुपये तक की प्रोजेक्ट फंडिंग दे रही है। इसके अलावा भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन, शोध पीठों की स्थापना, फैलोशिप में वृद्धि और आधुनिक विज्ञान केंद्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश के युवा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा शोध के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का नवाचार एवं अनुसंधान के माध्यम से विकास कर नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर सकें तथा उत्तर प्रदेश को विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर परचम लहरा सकें।




