पुणे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि “‘वसुधैव कुटुंबकम्’ ही हमारे भारत की मूल पहचान और संस्कृति है। इस जीवन-दृष्टि के अनुरूप संघ के स्वयंसेवकों को समाज-परिवर्तन और देश के सर्वांगीण विकास के लिए समाज में प्रत्यक्ष उतरकर कार्य करना चाहिए। राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में समाज की समस्त सज्जनशक्ति को साथ लेकर काम करने के लिए संघ सदैव तत्पर है”।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (विद्यापीठ भाग) की ओर से आयोजित विजयादशमी उत्सव में फर्ग्यूसन महाविद्यालय के एम्फीथिएटर में मनमोहन वैद्य जी मुख्य वक्ता रहे। इस दौरान मंच पर कार्यक्रम अध्यक्ष प्रसिद्ध कैंसर शल्यचिकित्सक (सर्जन) डॉ. शैलेश पुणतांबेकर रहे। विद्यापीठ भाग संघचालक सुभाष कदम और गोखलेनगर भाग संघचालक अनिल देशमुख विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंगलवार (दि. २० अक्तूबर) को पुणे शहर में युवाओं के कुल ५९ सघोष पथ संचलन अत्यंत अनुशासित और उत्साही वातावरण में संपन्न हुए, जिसमें २१ हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया। बाल विभाग सहित शेष संचलन आगामी सप्ताह में संपन्न होंगे।
संघ शताब्दी वर्ष के विभिन्न आयोजनों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, “स्वयंसेवकों को स्वयं में ‘स्व-बोधपुण’ और स्व-जागरूकता उत्पन्न कर उसे प्रत्यक्ष अपने आचरण में उतारना समय की आवश्यकता है। तभी देश प्रगति के पथ पर तीव्रता से आगे बढ़ेगा। हमें अपनी प्राचीन संस्कृति के कालजयी एवं समृद्ध मूल्यों को गर्व के साथ अपनाना चाहिए। संघ में व्यक्ति निर्माण ही मुख्य ध्येय है, तथा राष्ट्र विकास की स्पष्ट दृष्टि होने के कारण ही आज समाज संघ की ओर आकर्षित हो रहा है।”
समाज की बढ़ती अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “उचित दृष्टिकोण अपनाकर यदि स्वयंसेवक पहल करें, तो समाज की अनेक समस्याएं हल हो सकती हैं। इसी भावना के साथ संघ सेवा, संपर्क, ग्राम विकास, गौसेवा, सद्भाव, सामाजिक समरसता, धर्मजागरण और शिक्षा जैसे विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक कार्य कर रहा है।”
पुणे विश्वविद्यालय में पथसंचलन एवं शस्त्रपूजन उत्सव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विद्यापीठ नगर और विद्यापीठ भाग की ओर से विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को पथ संचलन एवं शस्त्रपूजन उत्सव का आयोजन किया गया था। सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के अंतर्गत विद्यापीठ स्कूल के प्रांगण में संपन्न कार्यक्रम में महेश पोहनेरकर प्रमुख वक्ता रहे। प्रसिद्ध उद्योजक गिरधर काळे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे, मंच पर विद्यापीठ भाग के संघचालक सुभाष कदम की प्रमुख उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अनुशासित पथ संचलन, आकर्षक घोषवादन, शारीरिक प्रात्यक्षिक, शस्त्र पूजन और बौद्धिक मार्गदर्शन जैसे विभिन्न कार्यक्रम अत्यंत उत्साह के साथ संपन्न हुए।



