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50 वर्षों तक राष्ट्रसेवा को समर्पित रहे श्री धर्मवीर सिंह जी को शंकर आश्रम में श्रद्धांजलि

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शंकर आश्रम मेरठ मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री धर्मवीर सिंह जी की श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया गया ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक धर्मवीर सिंह का जन्म 24 जुलाई, 1947 को उ.प्र. के बिजनौर जिले में स्थित गांव अस्करीपुर में हुआ था। उनके पिता श्री विश्वनाथ सिंह तथा माता श्रीमती मूंगिया देवी थीं। घर में खेती का काम था। जब धर्मवीरजी केवल एक वर्ष के ही थे, तो उनकी माताजी का निधन हो गया, अतः वे मां के प्यार से वंचित ही रहे। उनके दादा श्री शिवनाथ सिंह स्वाधीनता सेनानी थे; पर उन्होंने इससे कोई सुविधा नहीं ली तथा अपने किसी परिजन को भी इसका लाभ नहीं लेने दिया।
दादाजी आर्य समाज के प्रचार के लिए काफी समय घर से बाहर रहते थे; पर धर्मवीरजी की मां के निधन के बाद फिर वे कहीं नहीं गये। इस प्रकार उनका पालन दादाजी ने ही किया।

1966 में वे पढ़ाई के लिए अपने मामाजी के गांव बसेड़ा कुंवर गए हुए थे। वहां संघ की शाखा लगती थी। अपने ममेरे भाई ओमप्रकाश सिंह के साथ वे भी वहां जाने लगे कुछ ही समय बाद धर्मवीरजी ने मुख्यशिक्षक बनकर स्वयं शाखा लगाना शुरू कर दी।

1967 से 71 तक उन्होंने रामगंगा बांध परियोजना के कालागढ़ स्थित प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र की फार्मेसी में काम किया। 1968, 69 तथा 1971 में उन्होंने क्रमशः तीनों संघ शिक्षा वर्ग पूरे किये और नौकरी छोड़ संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गये। चमोली, जोशीमठ, कर्णप्रयाग के बाद उन्हें 1975 में चमोली जिला प्रचारक बनाया गया; पर तभी देश में आपातकाल और फिर संघ पर प्रतिबंध भी लग गया। इससे वे कभी पहाड़ तो कभी बिजनौर जिले में जन जागरण करते रहे। एक बार पुलिस वालों ने उनके गांव आकर उनके घर की कुर्की भी की धर्मवीरजी को पैदल चलने का बहुत अभ्यास रहा है।

आपातकाल में कई बार सड़क पर पुलिस दिख जाती थी। अतः वे पैदल मार्गों से, एक से दूसरी पहाड़ी पर होकर निकल जाते थे। इस प्रकार उन्होंने पूरे गढ़वाल में संपर्क बनाये रखा। एक बार वे साहसपूर्वक बिजनौर जेल में जाकर वहां बंदी कार्यकर्ता विद्यादत्त तिवारी से खुद को उनका बड़ा भाई बताकर मिल भी आये। बाद में जब जेल अधिकारियों को असली बात पता लगी, तो बड़ा हड़कम्प मचा।

प्रतिबंध हटने पर उन्हें फिर चमोली जिले का काम दिया गया; पर आपातकाल के अस्त-व्यस्त जीवन से उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। अतः वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नकुड़, हरदोई, पीलीभीत, रामपुर, चांदपुर, नौएडा, दादरी, आदि में नगर तथा तहसील प्रचारक रहे। कई वर्ष वे प्रांत कार्यालय (आगरा) की व्यवस्था में भी सहयोगी रहे। उत्तरांचल और मेरठ प्रांत में सेवा प्रमुख रहे

धर्मवीरजी को संघ कार्य में मा. रज्जू भैया, ओमप्रकाशजी, कौशलजी, ज्योतिजी, सूर्यकृष्णजी, गजेन्द्र दत्त नैथानी, अशोक सिंहल, भाउराव देवरस, माधवराव देवड़े आदि वरिष्ठ प्रचारकों का भरपूर सान्निध्य और स्नेह मिला। दुबली देह के बावजूद वे दृढ़ संकल्प के धनी थे।

इन दिनों वे मेरठ के प्रांतीय कार्यालय में रह रहे थे। पिछले 11 दिनों से गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती थे। 23 जून की रात्रि 9 बजे उनका शरीर शांत हो गया। 79 वर्ष की जीवन यात्रा पूर्ण की। अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष मां भारती की सेवा में प्रचारक के रूप में निरंतर अनथक सेवा की। ऐसे तपस्वी साधक का जाना एक युग की समाप्ति है।

श्रद्धांजलि सभा मे श्री दर्शन लाल अरोड़ा जी व ईश्वर जी (क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य) नरेश जी क्षेत्र शारीरिक शिक्षण प्रप्रमुख),अनिल जी प्रान्त प्रचारक, विनय जी प्रान्त सह व्यवस्था प्रमुख, जतन स्वरूप जी विभाग संघचालक आदि वक्ताओं द्वारा धर्मवीर जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया

सभा मे सुरेंद्र जी प्रान्त प्रचार प्रमुख, वेदपाल जी प्रान्त सह संपर्क प्रमुख, नवाब सिंह नागर क्षेत्र अध्यक्ष भाजपा, राजेंद्र अग्रवाल पूर्व सांसद, अमित अग्रवाल कैंट विधायक, हरिकांत अहलुवालिया मेयर, आदि अनेकों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।