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विजयादशमी उत्सव में पंच परिवर्तन को जीवन आचरण में अपनाने का आह्वान

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पूर्णिया, बिहार

विजयादशमी (दशहरा) के उपलक्ष्य पर एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस के निमित्त पूर्णिया जिला मुख्यालय में पथ संचलन का आयोजन किया गया। सीमांचल के प्रमुख केंद्र पूर्णिया में आयोजित संचलन में स्वयंसेवकों ने गणवेश में भाग लिया।

विजयादशमी उत्सव की शुरुआत पूर्णिया शहर स्थित कला भवन में प्रातः 08:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंचसीन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, विभाग संघचालक ठाकुर रामनारायण सिंह जी एवं जिला संघचालक डॉ. एच एन राय जी ने भारत माता, संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी एवं श्री गुरुजी के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई।

सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि यह पर्व केवल रावण पर श्रीराम की विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का शाश्वत संदेश देता है। ​”1925 में विजयादशमी के ही दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। संघ का मुख्य उद्देश्य भारत माता को परम वैभव पर ले जाना है।

उन्होंने पंच परिवर्तन की पांच पहलों ….

सामाजिक समरसता: समाज में जाति-पाति, ऊँच-नीच के भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर एक सशक्त और एकजुट समाज का निर्माण करना।

​पर्यावरण संरक्षण: प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता।

​कुटुंब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों को सहेजना, नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति व नैतिक मूल्यों से जोड़ना।

​स्वदेशी का अपनाना: स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाना और प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्र प्रथम की भावना जगाना है।”

नागरिक कर्तव्य बोधः को जीवन आचरण में लाने का आह्वान किया। ​बौद्धिक कार्यक्रम एवं प्रार्थना के उपरांत पथ संचलन का निकला। पथ संचलन का स्वागत करने के लिए पूर्णिया शहर के नागरिकों में उत्साह देखा गया। संचलन के निर्धारित मार्ग पर लोग अपने-अपने घरों की छतों, बालकनी और सड़क किनारे खड़े थे। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक एवं प्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों ने स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा की।