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CM योगी ने श्रीराम के आदर्शों और धर्म की विजय का दिया सन्देश

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शारदीय नवरात्र की महानवमी और विजयादशमी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को बधाई दी और अपनी ‘योगी की पाती’ में भगवान श्रीराम के जीवन के प्रसंगों को याद किया। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा का प्रबल पराक्रम और प्रभु श्रीराम का धर्मनिष्ठ जीवन हमें अन्याय के प्रतिकार, नारी-सम्मान तथा कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है।

सीएम योगी ने कहा कि अन्यायी और अधर्मी चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। विजयादशमी इसी साक्षात सत्य का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन संस्कृति विजय के उल्लास के साथ विनम्रता और ज्ञान के प्रति सम्मान का भाव भी सिखाती है। उन्होंने मां और मातृभूमि के प्रति प्रेम तथा कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया। साथ ही सीएम योगी ने प्रभु श्रीराम को समरसता और सामाजिक एकात्मता का प्रतीक बताते हुए कहा कि रामलीला में सभी लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्श केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व के अनेक देशों की सांस्कृतिक परंपराओं में भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप ही प्रदेश में कानून का शासन और नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। माफिया और संगठित अपराध के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए सरकार की ओर से निर्णायक कदम उठाए गए हैं। सीएम योगी ने कहा कि माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए आवास बनाए गए हैं। अपनी पाती में कसारी मसारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मुक्त कराई गई भूमि पर गरीबों के लिए आवास बनाए जाएंगे। पूरे क्षेत्र को कृष्णपुरी के नाम से विकसित किया जाएगा।

अपराधियों और माफियाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति से कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। सुरक्षित और समरस समाज के निर्माण के लिए शासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस विजयादशमी पर अहंकार, अन्याय, भेदभाव और नकारात्मकता रूपी रावण का दहन करने का संकल्प लें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति किसी व्यसन से पीड़ित है, तो उसे तिरस्कार नहीं, बल्कि सहयोग और संवेदना देनी चाहिए। साथ ही, उसे स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।