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देहरादून में स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन, समरसता और संगठन का संदेश

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देहरादून

-देहरादून में संघ स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन

-संस्कृति, शक्ति और विश्व नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम

-कदम से कदम मिलाकर बढ़े 11 नगरों के स्वयंसेवक

देहरादून में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर भव्य कार्यक्रम और पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

देहरादून के परेड ग्राउंड में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड प्रांत प्रचार प्रमुख संजय जी ने कहा कि भारत फिर से अपने सांस्कृतिक गौरव की ओर बढ़ रहा है। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और हिंदुत्व की जीवन दृष्टि आज दुनिया में फिर से स्थापित हो रही है और विश्व भारत को मार्गदर्शन के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामाजिक व्यवस्था वैश्विक शांति और संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज में एकता और समरसता को मजबूत करने की बात कही।


भारतीय पंचांग के बारे में उन्होंने बताया कि यह बहुत प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति है। वर्तमान में विक्रम संवत 2083 चल रहा है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है। भारतीय युगाब्द के अनुसार वर्तमान काल 5128 वर्ष से अधिक और सृष्टि कालगणना के अनुसार लगभग 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख वर्ष से अधिक माना जाता है।

नववर्ष के प्रमुख विषयों में संत रैदास जी की 650वीं जयंती, वंदे मातरम की 150वीं जयंती, राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा 550 वर्षों का इतिहास और गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस शामिल हैं। इनका उद्देश्य महापुरुषों को याद करना और उनके मार्ग पर चलना है।

स्वयंसेवकों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर समाज को संगठित करना जरूरी है। समरसता, सेवा और राष्ट्रभक्ति को समाज का आधार बताया गया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पानी बचाने, पेड़ लगाने और प्लास्टिक हटाने का संदेश दिया। साथ ही परिवार, भाषा, भोजन और संस्कृति को बचाए रखने पर जोर दिया। स्वदेशी के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात भी कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता 108 महंत कृष्णा गिरी महाराज ने की। उन्होंने संघ के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

बौद्धिक कार्यक्रम के बाद हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। स्थानीय लोगों ने फूल बरसाकर और भारत माता के जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। पथ संचलन परेड मैदान से शुरू होकर सर्वे चौक, ईसी रोड, नैनी, भेल चौक, घंटाघर और बुद्धा चौक होते हुए फिर से परेड मैदान में समाप्त हुआ। इस आयोजन में महानगर के 11 नगरों के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। रास्ते में सिख, गोर्खाली और जौनसारी समाज के लोगों के साथ स्थानीय नागरिकों और महिलाओं ने भी स्वागत किया। इस कार्यक्रम में संघ के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।