उत्तरकाशी
आस्था के नाम पर बहाए गए कपड़े, प्रदूषण की वजह बन रहे थे। लेकिन नया भारत, समस्या नहीं, समाधान ढूंढ निकालता है। उत्तरकाशी की महिलाओं ने भी नगरवासियों समेत नदियों के लिए समस्या बने इस कचरे को ऐसा रूप दिया कि सब हैरान रह गए। महिलाओं की ‘वेस्ट टू रिसोर्स’ पहल ने 15 टन कपड़ों को संसाधन में बदल दिया स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने कचरे से तैयार किए-आकर्षक फाइल फोल्डर, दरी और मैट कचरे से तैयार ये उत्पाद इतने आकर्षक बने कि शुरुआत में ही 3 लाख रुपये से अधिक का ऑर्डर मिल गया। स्थानीय उत्पाद, स्थानीय रोजगार बने। यही है आत्मनिर्भर भारत की पहचान न केवल रोजगार बने, बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाए वही है नए भारत की ओर मजबूत कदम उत्तरकाशी की महिलाओं ने भी वेस्ट टू रिसोर्स पहल से जल प्रदूषण पर भी बड़ा ब्रेक लगा दिया। अब इस अनोखी पहल को देश का सम्मान मिला है नई दिल्ली में 106वें स्कॉच गुड गवर्नेंस अवॉर्ड से उत्तरकाशी को सम्मानित किया, तो इन महिलाओं की आंखें भी चमक उठी। और चेहरे गर्व से खिल उठे। ये है नया भारत, जहां आस्था भी सुरक्षित, प्रकृति भी सुरक्षित और हर हाथ, कौशल के धागे से बन रहा है आत्मनिर्भर।



