चंदौली, उत्तर प्रदेश
बायोगैस से आत्मनिर्भर बना एकौनी गांव, 125 परिवारों को मिल रही रसोई गैस
देश के कई हिस्सों में एलपीजी की किल्लत से लोग सिलेंडर के लिए परेशान हैं। लेकिन चंदौली के नियमताबाद ब्लॉक के एकौनी गांव में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां 125 परिवार बायोगैस से खाना बना रहे हैं, वो बिना किसी लाइन में लगे और बिना टेंशन। यहाँ सुबह और शाम तीन-तीन घंटे गैस सप्लाई मिल रही है, जिससे आसानी से खाना पक रहा है। इस बदलाव के पीछे हैं गांव के युवा चंद्र प्रकाश सिंह की पहल, जो भोपाल से बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने की बजाय गाँव लौट आए और पिता जी के साथ गौशाला का काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उनके पिता ने 10 वर्ष पूर्व 50 गायों से इसकी शुरुआत की थी। जिसे चंद्र प्रकाश ने बढ़ाकर 200 गायों तक पहुंचा दिया। लगभग 4 वर्ष पूर्व उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर गौशाला से निकलने वाले गोबर के उपयोग की योजना बनाई और बायोगैस प्लांट लगाया। प्रतिदिन लभग 3000 किलो गोबर का इस्तेमाल कर 125 परिवारों को इसका कनेक्शन दे दिया।
गांव की महिलाओं का कहना है कि अब अब उन्हें गैस के लिए कहीं लाइन में नहीं लगना पड़ता और वे अपनी सुविधा के अनुसार खाना बना पाती हैं। बायोगैस न केवल सस्ती है बल्कि काफी सुविधाजनक भी है। यह मॉडल सस्ता और सुविधाजनक होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। जब देश गैस संकट से जूझ रहा है, तब एकौनी गांव बता रहा है - आत्मनिर्भरता ही असली समाधान है।



