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भारत एक आध्यात्मिक एवं हिन्दू राष्ट्र है- रमेश जी

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भारत एक आध्यात्मिक एवं हिन्दू राष्ट्र है- रमेश, प्रान्त प्रचारक, गोरक्षप्रान्त

पूज्य संतों की अगुवाई में देश आगे बढ़ा है। संपूर्ण दुनिया में जो गौरवपूर्ण स्थान इस देश को मिला उसके पीछे यहां की संत परंपरा है, आध्यात्मिक चेतना है, आध्यात्मिक शक्ति है। इन्ही पूज्य सन्तों द्वारा सनातन का धर्म का प्रचार होता है और धर्म को परिभाषित किया जाता है, और हिंदू धर्म क्या है? हिंदू परंपरा क्या है? हिंदू संस्कृति क्या है? इसकी व्याख्या पूज्य सन्तों द्वारा बताया गया। सनातन जो चीर पुरातन है। लेकिन वास्तव में सनातन धर्म जीवन जीने की कला है। सनातन केवल एक धर्म नहीं है। सनातन धर्म जीवन जीने की शैली है। सनातन एक वृत्ति है, सनातन धर्म एक अवधारणा है। इसलिए सनातन धर्म को केवल पूजा पद्धति में व शब्दों में बांधना न्यायोचित नहीं होगा। सनातन धर्म उद्घोष करता है  'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद दुख भागभवेत' यह ही सनातन धर्म है और सनातन कहता है वसुधैव कुटुंबकम्। सनातन ही कहता है सभी की सुख के कामना निर्मल पावन भावना। संपूर्ण सृष्टि में, संसार में, ब्रह्मांड में केवल एक ही धर्म है। बाकी सब पूजा पद्धति है। पंथ है। हम कहीं से भूल से बोल देते हैं, अज्ञानता बस बोल देते हैं  सर्व धर्म सम्भाव। क्या हमारे पूज्य संत महाराज जी, आचार्य जी इसकी अनुमति देंगे। मुझे लगता है अनुमति नहीं देंगे। क्या यह आध्यात्मिक परंपरा, इस देश की चेतना या देश की सांस्कृतिक परंपरा इन शब्दों को बोलने के लिए अनुमति देगी मुझे लगता है नहीं देगी। क्यों क्योंकि पूरे ब्रह्मांड में, पूरे परंपराओं में एक ही धर्म है और वो है सनातन धर्म बाकी सब पंथ है, संप्रदाय है। जो सर्वाग्रही है, सर्वव्यापी है वही सनातन धर्म है।


सनातन के गहराइयों में जाएंगे तो कभी सामाजिक विषमता नहीं होगी। मन के भीतर भी नहीं होगा। जो सच्चा सनातनी है वही देश और धर्म के संरक्षण के लिये मर सकता है, मिट सकता है लेकिन सनातन को मिटने नहीं देता। सनातन का मतलब अगर दीवारों में चुनना या अपनी संस्कृति-धर्म परिवर्तित करना है तो सच्चे सनातनियों ने दीवारों में चुनना स्वीकार किया परंतु धर्म पर आँच आने नहीं दिया ।


सनातन का मतलब क्या होता है? सनातन का मतलब केवल मंदिर में जाकर भगवत या भगवती आराधना नहीं है। सनातन संस्कार है, सेवा है। सनातन अनुशासन का प्रतिबिंब है, प्रतिरूप है। 

अन्य मतावलंबी-मजहब के लोग कहते हैं हमारे यहां तो मजहब से बड़ा कोई नहीं है, मजहब ही सर्वोपरि है। केवल सनातनी ही कहता है मजहब से  भी बड़ा होता है धर्म,सनातन धर्म से बड़ा है कोई है तो वो राष्ट्र है, भारत है। केवल सनातनी कहता है, केवल व केवल हिंदू ही कहता है राष्ट्र सर्वोपरि है। इसलिए हिंदू ही इस देश के लिए आहुति देता है। हिंदू ही है जो देश के लिए मर मिटता है। हिन्दू ही है जो कहता है जिए देश हित मरें देशहित, तिल-तिल कर गल जाना सीखें, कंटक-पथ अपनाना सीखें। इसलिए हिंदू ही भारत का राष्ट्रीय समाज है।

आज दुनिया में कितनी प्रकार की विकृतियां हैं? कितनी प्रकार की चुनौतियां हैं? क्या वह हमारे देश में नहीं है?हमारे देश में भी चुनौतियां हैं। हमारे देश के अंदर भी विकृतियां हैं। उन चुनौतियों से निकल सकते हैं उसके लिए एक ही उपाय है आध्यात्मिक जीवन शैली। आध्यात्मिक जीवन शैली से ही हम अपने को कुरीतियों और विसंगतियों से बच सकतें हैं। इसलिए सदियों से हजारों वर्षों से भारत सुरक्षित रहा है भारत अभेद्य रहा है क्योंकि यहां आध्यात्मिक परंपरा और अध्यात्मिकता हर घर में हर जेहन में प्रत्येक परिवारों में चिन्तन होता था इसलिए भारत का प्रत्येक परिवार सुरक्षित और संरक्षित रहता था। 


प्रांत प्रचारक रमेश ने आगे जोर देके कहा सामाजिक समरसता यदि भगवान राम ने अपने जीवन में समरसता स्थापित नहीं की होती, तो लोग उन्हें भगवान नहीं मानते।लोग कहते हैं भारत के अंदर छुआछूत सामाजिक विषमता तो बहुत पहले से थी। यदि छुआछूत बहुत पहले से होती तो चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ वो सुमंत एक ही गुरुकुल में नहीं पढ़ते। एक समाज के सबसे ऊंचे स्थान का व्यक्ति वो एक निचले स्थान का व्यक्ति एक ही शिक्षा मंदिर में जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इससे बड़ा सामाजिक समरसता का उदाहरण नहीं हो सकता।

प्रकृति का संरक्षण होता था। माता सीता अपने बच्चों से कहते की बेटा ही है पेड़ क्यों काटता है, उसमें भी जीव है। लवकुश को समझ में आता कि पेड़ों में भी जाता है। पेड़ लगाना व उसका संरक्षण करना, जैसे हम बच्चों का संरक्षण करते है, बच्चों के स्वास्थ्य की, शिक्षा की, संस्कार की वैसे ही वृक्षों की भी चिंता करनी पड़ेगी तब जाकरके पर्यावरण का संरक्षण होगा। जल के संरक्षण के संबंध में उन्होंने उपस्थित माताओं बहनों से जल के संरक्षण की बात कही।

स्व का जब जागरण होता है तब बहुत बड़ा परिवर्तन आता है। हनुमान जी का स्व जगा तो सबसे कठिन कार्य विशाल समुद्र को लांघ गए। अंगद का जब स्व जगा तो लंका के राक्षस समुदाय ने उनके प्रताप को देखा। हिंदू समाज का भी स्व जगा था। 6 दिसंबर 1992 में जब हिंदू समाज आक्रोशित हुआ था तब तथाकथित कलंकित ढांचा, जो बाबर ने श्रीराम मंदिर को तोड़कर बनाया था उसे हिंदू समाज ने दशा दिया। तब हिंदू समाज के शौर्य को दुनिया ने देखा।

भाषा, भूषा,भजन, भोजन, भवन व भ्रमण इनसे भारत की भव्यता व भारत में दिव्यता और संपूर्ण दुनिया का मार्गदर्शन करने में समर्थ होगा। उन्होंने इस अवसर पर आह्वान किया कि हमें अपना हस्ताक्षर अंग्रेजी के बदले हिंदी में करें।

उन्होंने नागरिक कर्तव्य के विषय में बताते हुए कहा कि जो व्यवस्था सबके लिए बराबर है, जो नियम बनी है सबके लिए बराबर। कर्तव्य की चर्चा कम हो रही है, अधिकारों की चर्चा अधिक हो रही है। जब हम कर्तव्यों की चर्चा करना प्रारम्भ करेंगे तभी यह देश विश्व गुरु की ओर बढ़ेगा। भारत विश्व गुरु है, हिन्दू राष्ट्र है। अपने आचरण से सम्पूर्ण दुनिया को दिखाना है कि भारत विश्व गुरु है।

अपने आशीर्वचन में पूज्य संत रामानुजाचार्य महाराज जी ने  कहा कि हिन्दु तो जगा है। बस हिन्दू को संगठित करने की आवश्यकता है। अपने उद्बोधन में लाडली किशोरी ने प्रभु श्रीराम के आचरण को अपने में अपनाने की बात कही।

इस अवसर पर परमेश्वरनश्री, अरुण मणि, अखिलेश्वर, प्रवीण, ओम प्रकाश तिवारी, ओम प्रकाश मिश्र, बलदाऊ सिंह, रामभूषण,  धनंजय सिंह, भीम सिंह, सचिन मिश्र,  अमिताभ श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे ।