बागेश्वर, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड के बागेश्वर की कंचन उपाध्याय पारंपरिक ऐपण कला को नया रूप देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। जी हां, पुरानी थालियों, बोतलों, बर्तनों और बेकार कपड़ों को सजावटी सामान और आकर्षक गिफ्ट आइटम में बदलकर उन्होंने कला को आजीविका का माध्यम बनाया है। अब तक वह 250 से ज्यादा महिलाओं को ऐपण कला का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
ऐपण उत्तराखण्ड की पारंपरिक लोककला है, जिसका प्रयोग घरों की देहरी, पूजा स्थलों और शुभ
अवसरों पर सजावट के लिए किया जाता है। कंचन उपाध्याय ने इस पारंपरिक कला को नए
प्रयोगों के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
वर्ष 2019 में गृह विज्ञान से एमए की
पढ़ाई के दौरान उन्होंने ऐपण कला पर शोध किया। इसके लिए उन्होंने चंपावत, पिथौरागढ़ और हल्द्वानी जाकर स्थानीय कलाकारों से पारंपरिक
डिजाइन और कला की बारीकियां सीखीं। धीरे-धीरे यही सीख उनके जुनून के साथ-साथ
आजीविका का जरिया भी बन गई।
कंचन ने पुरानी थालियों, बोतलों, बर्तनों और कपड़ों पर ऐपण कला का प्रयोग
शुरू किया। इन वस्तुओं को कलात्मक रूप देकर उन्होंने सजावटी उत्पाद और उपहार
सामग्री तैयार की। उनके इस प्रयास से बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का दोबारा
उपयोग होने लगा और कला को नए बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिला।
कंचन की पहल अब दूसरी महिलाओं को भी हुनरमंद बनाने का माध्यम बन रही है। उनके साथ करीब 8 से 10 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं। इसके अलावा, वह जन शिक्षण संस्थान और उद्योग विभाग के सहयोग से गांवों और स्कूलों में भी ऐपण कला का प्रशिक्षण देती हैं। अब तक 250 से ज्यादा महिलाओं को इस पारंपरिक कला का हुनर सिखा चुकीं कंचन जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त प्रशिक्षण भी देती हैं, ताकि वे अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार इस कला को रोजगार से जोड़ सकें।
त्योहारों पर बढ़ती है ऐपण उत्पादों की
मांग
करवाचौथ और दीपावली जैसे त्योहारों पर ऐपण से बने सजावटी उत्पादों और गिफ्ट आइटम की मांग रहती है। ऐसे अवसर पारंपरिक कला से जुड़े उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और महिला कलाकारों के लिए कमाई के अवसर तलाशने में मदद कर सकते हैं। कंचन उपाध्याय की पहल यह संदेश देती है कि पारंपरिक कला और रचनात्मक सोच के मेल से बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को भी नया रूप दिया जा सकता है। अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए हुनर को रोजगार से जोड़ना महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सार्थक कदम हो सकता है।



