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मेरठ की गजक को मिली वैश्विक पहचान

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मेरठउत्तर प्रदेश

मेरठ की 121 साल पुरानी गजक को अब जियोग्राफिक इंडिकेशन यानि कि GI टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से गजक बनाने वाले कारीगरों और व्यापारियों में खुशी की लहर है। बता दें मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन ने इसके लिए चेन्नई स्थित संस्था में आवेदन किया था।

एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण गुप्ता ने बताया कि गजक और रेवड़ी के कारोबार से मेरठ में 10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। GI टैग मिलने से अब मेरठ की गजक को देश-विदेश में और अधिक पहचान मिलेगी।

इस सफलता में जीआई मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. रजनीकांत का भी अहम योगदान रहा। संस्था के महामंत्री और बंगाल स्वीट हाउस के संचालक समीर थापर ने बताया कि अब जब भी दुनिया में कोई गजक या रेवड़ी सर्च करेगातो मेरठ का नाम सबसे पहले सामने आएगा।

क्या है GI टैग

GI टैग किसी खास क्षेत्र से जुड़े उत्पाद को दिया जाने वाला प्रमाण हैजो उसकी गुणवत्तापहचान और विशेषता को दर्शाता है। इससे नकली सामान पर रोक लगती है और स्थानीय उत्पादकों को बेहतर दाम और वैश्विक पहचान मिलती है। अब GI टैग मिलने के बाद मेरठ की गजक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।