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पुश्तैनी काम से प्रीति ने बनाई पहचान

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आगरा, उत्तर प्रदेश 

यूपी के आगरा के चंदसौरा गांव की रहने वाली प्रीति ने ससुराल से मिले शहद के पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाकर उसे व्यवसाय का रूप दे दिया है। उनके इस प्रयास से आज दर्जनों परिवारों को रोजगार मिल रहा है। वही प्रीति के शहद की मिठास अब देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। इसके पीछे कई महिलाओं की मेहनत शामिल है, जिससे उनके परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

बता दें प्रीति सामाजिक विज्ञान में पोस्टग्रेजुएट हैं। शादी के बाद उन्हें ससुराल में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन का काम विरासत में मिला, जो पहले केवल परिवार तक ही सीमित था। प्रीति ने इस काम को आगे बढ़ाने और शहद को देशभर में पहचान दिलाने का सपना देखा। करीब एक साल पहले उन्होंने गेंदा बाबा स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह के माध्यम से वे अधिकारियों के संपर्क में आईं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्रेरणा और सहयोग मिला। इससे शहद उत्पादन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।

प्रीति मधुमक्खी पालन के माध्यम से शहद का उत्पादन कराती हैं। उनके ससुराल पक्ष के लोग दूर-दूर तक मधुमक्खी के बॉक्स लगाकर शहद तैयार करते हैं। इसके बाद प्रीति ने शहद प्रसंस्करण इकाई लगाने का साहसिक निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने बैंक से आठ लाख रुपये का ऋण लिया और प्रोसेसिंग का काम शुरू किया। घर पर मशीनों के माध्यम से शहद की प्रोसेसिंग की जाती है। 250 ग्राम, आधा किलो, एक किलो और अन्य वजन में शहद की पैकिंग की जा रही है। इस शहद को जीबी गोल्ड हनी नाम से बाजार में उतारा गया है। इस काम से कई महिलाओं को जोड़ा गया है।

प्रीति का कहना है कि अभी प्रोसेसिंग यूनिट की शुरुआत की गई है। आने वाले समय में इसे और बड़ा किया जाएगा। जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे महिलाओं को रोजगार के और अवसर मिलेंगे। फिलहाल आगरा के साथ-साथ मुरादाबाद, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में जीबी गोल्ड हनी की बिक्री हो रही है।