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अंगदान, देहदान से बड़ा महादान कोई और नहीं है - डॉ. विनोद जी

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नई दिल्ली

दधीचि देहदान समिति ने यूसीएमएस (UCMS) जीटीबी अस्पताल के सभागार में देहदानियों के 64वें उत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर दधीचि देहदान समिति के संरक्षक आलोक कुमार; डॉ. धीरज शाह, प्रिंसिपल UCMS; डॉ. रेणु चौहान, डायरेक्टर एनाटॉमी; आशीर्वचन साध्वी समाहिता जी, वात्सल्य ग्राम, वृंदावन; अध्यक्षता डॉ. महेश पंत, अध्यक्ष दधीचि देहदान समिति सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 100 लोगों ने नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान का संकल्प लिया। कार्यक्रम में समिति ने ऐसे परिवारों का सम्मान किया, जिनके परिजनों का नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान का संकल्प पूरा हुआ।

डॉ. महेश पंत ने समिति के कार्यों का परिचय दिया तथा उपस्थित लोगों से नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान का प्रण लेने का आह्वान किया। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विनोद ने कहा कि अंगदान, देहदान से बड़ा महादान कोई और नहीं है। किडनी, लीवर आदि का दान आप जीवित रहते हुए कर सकते हैं। लेकिन आवश्यक है कि समाज में लोगों को जागरूक किया जाए कि ब्रेन डेड स्थिति में हार्ट एवं लंग्स ट्रांसप्लांट हो सकते हैं। इस क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने के लिए दधीचि देहदान समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

प्रिंसिपल डॉ. धीरज शाह ने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए मानव शरीर के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, मानव शरीर की जटिलताओं को समझने के लिए मानव शरीर की आवश्यकता पड़ती है। समाज से आह्वान किया कि अंगदान, देहदान एवं नेत्रदान के लिए स्वयं प्रेरित हों एवं अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। सभी दानी परिवारों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपने परिजनों की देह, नेत्र एवं अंगों का दान किया है।

एनाटॉमी विभाग की डायरेक्टर डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि किस तरह से विद्यार्थी प्रत्येक कैडेवर पर अपनी शिक्षा प्राप्त करता है। साथ ही, किस तरह से यहां के विद्यार्थी लोगों को जागरूक करने के लिए काम कर रहे हैं।

साध्वी समाहिता जी ने देहदान, अंगदान एवं नेत्रदान के बारे में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करते हुए देहदान के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने पहले देहदानी महर्षि दधीचि के त्याग एवं बलिदान के बारे में बताया। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वे देहदान, अंगदान एवं नेत्रदान करने का संकल्प लें। ये जीवन का सबसे बड़ा दान है।

समिति के महामंत्री डॉ. विशाल चड्ढा ने सभी देहदानियों के परिवार के सदस्यों का सम्मान करवाया एवं सभी देहदानियों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी ने दिवंगत पुण्य आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा।

समिति के संरक्षक आलोक कुमार जी ने अपनी कई स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कमल बेरी जी और उनकी पत्नी का स्मरण किया। दोनों ने कैसे देहदान का संकल्प लिया और उसे पूर्ण भी किया।

उन्होंने गोपाल कृष्ण अरोड़ा जी के देहदान का भी स्मरण किया, UCMS में ही उनका शरीर दान किया गया था। उन्होंने बताया कि उनका नाती (गोपाल कृष्ण) उस समय इसी कॉलेज में पढ़ रहा था। कुछ दिन बाद उनके नाती ने अपने पिता को फोन किया और बताया कि वो अपने नाना के शरीर पर पढ़ाई कर रहा है।

आलोक जी ने कहा कि भारत अभी इस क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। स्पेन में सबसे अधिक दान होते हैं। भारत में सबसे कम दान होता है। हमें इसके लिए प्रयास करना चाहिए। सबके सहयोग से ये संभव होगा।

कार्यक्रम संयोजक अशोक बंसल जी ने सफल आयोजन के लिए सबका आभार व्यक्त किया।