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सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानकर व्यवहार करना हिन्दू और हिन्दुत्व का चिंतन रहा है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

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सोलन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला सोलन द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त प्रमुख जन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। सह सरकार्यवाह जी ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन के पंच प्रणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सदैव विश्व में प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी रहा था। हमारा देश ज्ञान में, विज्ञान में और विश्व के कल्याण में तत्पर एवं सक्रिय रहता था। सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मान कर व्यवहार करना हिन्दू और हिन्दुत्व का चिंतन रहा है। पूर्व काल में शिक्षा के क्षेत्र में भारत निशुल्क शिक्षा प्रदान करता था और कई हस्तलिखित पुस्तकें हमारे पुस्तकालयों में होती थीं। सब तरह से संपन्न होने के बाद भी भारत अगर पराधीन हुआ तो इसका एक बड़ा कारण था हमारे समाज की एकजुटता न होना। बहुत से सामाजिक विषयों पर सामूहिक चिंतन का अभाव था। इसी कमजोरी का लाभ आक्रांताओं ने उठाया। संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने इसी अभाव को समाप्त करने के लिए और हिन्दू समाज को एकजुट करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।


उन्होंने कहा कि जो लोग हिन्दुत्व को संकीर्ण मानसिकता से देखते हैं, वे पश्चिमी विचार से प्रभावित हैं। हिन्दुत्व कोई रिलिजन न होकर एक विशाल परिभाषा है, जिसमें सभी को अपने-अपने विचार रखते हुए फलने-फूलने की स्वतंत्रता है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध एवं नागरिक अनुशासन के विषय पर सभी की भूमिका का निवेदन किया है।

जिज्ञासा समाधान सत्र में डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने राष्ट्र, समाज और संघ के संदर्भ में पूछे गए विभिन्न प्रश्नों सहित नशा निवारण, रोजगार, मतांतरण की चुनौती आदि विषयों पर उत्तर दिए। गोष्ठी में प्रशासनिक श्रेणी, अधिवक्ता, चिकित्सक, शोधकर्ता, विद्यार्थी, धार्मिक संगठन,शिक्षाविद् सहित विभिन्न श्रेणियों के 500 प्रमुख जन उपस्थित रहे।