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संस्कृत में पहली बार तैयार हुआ आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपूर्ण पद्यानुवाद

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देहरादून, उत्तराखण्ड

संस्कृत को भारत की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषा माना जाता है। पौराणिक काल से ही वेद, उपनिषद, पुराण और अनेक धार्मिक ग्रंथ इसी भाषा में रचे गए हैं। आज भी संस्कृत हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की पहचान है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखण्ड में एक ऐतिहासिक पहल की गई है।

उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने लोक भवन में आयोजित समारोह में ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ के संस्कृत पद्यानुवाद का लोकार्पण किया। पहली बार श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपूर्ण पद्यानुवाद संस्कृत भाषा में तैयार किया गया है। इसका अनुवाद रामतीर्थ केंद्र, सहारनपुर के सहयोग से साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ ने किया है। यह कार्यक्रम रामतीर्थ केंद्र की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया।

इसी कड़ी में राज्यपाल ने कहा कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी और संस्कृत का यह संगम भारतीय ज्ञान परंपरा को और समृद्ध करेगा तथा सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देगा।

आगे उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संदेशों को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में अपनाना भी जरूरी है। उनका विश्वास है कि संस्कृत में तैयार यह पद्यानुवाद आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन, शोध और आध्यात्मिक चिंतन का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

राज्यपाल ने साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ और इस कार्य से जुड़े सभी विद्वानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।