मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
ग्रामीण
महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारियां ही नहीं निभा रहीं, बल्कि अपनी मेहनत और हुनर के दम पर
आत्मनिर्भरता की नई प्रेरणा भी प्रस्तुत
कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर वे रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं
और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। मुरादाबाद
की कुछ महिलाओं ने भी ऐसा ही प्रेरणादायक कदम उठाया है। जी हां, मुरादाबाद में ‘मां शारदा’ स्वयं सहायता
समूह से जुड़ी 10
महिलाएं गाय के गोबर और मंदिरों से एकत्र किए गए सूखे फूल-पत्तों से हवन टिकली,
हवन सामग्री और हवन की लकड़ी तैयार कर
रही हैं। समूह की अध्यक्ष रजनी ने बताया कि पहले महिलाएं चिप्स और पापड़ बनाती थीं,
लेकिन अब उन्होंने पूजा में उपयोग होने
वाली पर्यावरण अनुकूल सामग्री तैयार करना शुरू किया है। सभी महिलाओं को अलग-अलग
जिम्मेदारियां दी गई हैं और वे मिलकर इस काम को सफल बना रही हैं।
हवन सामग्री बनाने के लिए पहले गाय का गोबर और मंदिरों से मिले फूल-पत्तों को इकट्ठा किया जाता है। फूलों को अच्छी तरह सुखाने के बाद उनका गोबर के साथ मिश्रण तैयार किया जाता है और सांचों की मदद से हवन टिकली व अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इन उत्पादों की मांग पूरे मुरादाबाद मण्डल में बढ़ रही है। समूह की महिलाओं के अनुसार इस काम से प्रत्येक सदस्य को हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक का लाभ हो रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और पूरा समूह मिलकर अच्छी आय अर्जित कर रहा है।
मेहनत,
सामूहिक प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर
ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनकर
महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं।



