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अयोध्या दीपोत्सव में 30 हजार वालंटियर बनाएंगे खास

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अयोध्या। 
- 37 इंटरमीडियट कॉलेजों और 40 स्वयंसेवी संगठनों भी देंगे अपना योगदान 

- घाटों की व्यवस्था को सुनिश्चित करेंगे वालंटियर

- दीपोत्सव में इस बार भी बनेगा विश्व रिकार्ड

अयोध्या में इस वर्ष की दिवाली के मौके पर एक विशाल आयोजन की तैयारी की जा रही है, जिसमें दीपोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए 30,000 वालंटियर शामिल होंगे। इन वालंटियर्स को 37 इंटरमीडियट कॉलेजों और 40 स्वयंसेवी संगठनों से चुना गया है, जो घाटों पर दीप बिछाने और जलाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

 

वालंटियर्स की बड़ी भूमिका

यह विशाल दीपोत्सव आयोजन अयोध्या के घाटों को रौशन करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। वालंटियर्स को प्रशिक्षित किया गया है कि वे दीपों को कैसे व्यवस्थित करें, ताकि घाटों पर एक अद्वितीय दृश्य उभरे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी दीप एक समान रूप से जलें और उन्हें सही जगहों पर रखा जाए, जिससे पूरे घाट पर दीयों की रोशनी के साथ दिव्य वातावरण का निर्माण हो सके।

30,000 वालंटियर्स की भागीदारी-

इस वर्ष दीपोत्सव को खास बनाने के लिए 30,000 वालंटियर्स को शामिल किया गया है। इनमें से अधिकतर वालंटियर्स 37 इंटरमीडियट कॉलेजों से हैं, जबकि 40 स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस आयोजन में मदद कर रही हैं। यह वालंटियर्स घाटों पर दीये लगाने और उन्हें जलाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। दीपोत्सव के दौरान, यह वालंटियर्स सुनिश्चित करेंगे कि अयोध्या के सभी प्रमुख घाटों पर लाखों दीये जलें और यह आयोजन विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक कदम हो।


ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व-

अयोध्या का यह दीपोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में जलाए गए दीपों का यह आयोजन राम की वापसी की ऐतिहासिक घटना को पुनः जीवंत करने के उद्देश्य से किया जाता है। इस आयोजन को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु और पर्यटक अयोध्या में इकट्ठा होते हैं।

ऐतिहासिक होगी दीपावली-

इस विशाल आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक महत्व को उजागर करना है, बल्कि एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना भी है। लाखों दीयों की रौशनी से सजी अयोध्या एक अद्वितीय दृश्य पेश करेगी, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आएंगे। इस आयोजन के माध्यम से न केवल अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को भी एक मंच प्रदान करेगा, जहां वे समाज और धर्म के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।