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आस्था के साथ सामाजिक संदेश: कांवड़ में बेटियों को बैठाकर निकला परिवार

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हरिद्वार, उत्तराखण्ड

कांवड़ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का भी माध्यम बन रही है। इस बार धर्मनगरी हरिद्वार में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। जी हां, अलीगढ़ का एक परिवार गंगाजल के साथ ‘बेटी बचाओ, बेटी सम्मान’ का संदेश लेकर 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकला है।

अलीगढ़ के बिलखोरा गांव निवासी संजू बाबा अपनी कांवड़ के एक छोर पर मां गंगा का पवित्र जल और दूसरे छोर पर अपनी 10 वर्षीय भांजी को बैठाकर अलीगढ़ की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं उनकी पत्नी बीना देवी भी अपनी कांवड़ में एक तरफ गंगाजल और दूसरी तरफ अपनी आठ वर्षीय बेटी राधा को बैठाकर भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए यात्रा कर रही हैं। उनकी यह अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

संजू का कहना है कि बेटियां ही समाज और सृष्टि का आधार हैं। अगर बेटियां सुरक्षित और सम्मानित रहेंगी, तभी समाज भी मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं। ऐसे में हर परिवार का कर्तव्य है कि वह बेटियों को सम्मान दे और बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करे।

साथ ही उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ रही कई गलत घटनाओं की वजह संस्कारों की कमी है। इसलिए बच्चों को बचपन से ही धर्म, सेवा, करुणा और नारी सम्मान की शिक्षा देना बेहद जरूरी है।

संजू ने बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी वृद्ध मां को कांवड़ में बैठाकर 300 किलोमीटर की यात्रा की थी। इस बार वह अपनी पत्नी के साथ ‘बेटी बचाओ, बेटी सम्मान’ का संदेश लेकर निकले हैं। उन्होंने बताया कि अपने गुरु बाबा मंगलनाथ की प्रेरणा से वे समाज सेवा और सनातन संस्कारों के प्रचार का संकल्प निभा रहे हैं।