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ऊन के धागों से बुनी आत्मनिर्भरता की कहानी

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देहरादून, उत्तराखण्ड

आत्मनिर्भर बनने के लिए हमेशा बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती, कई बार एक छोटा-सा हुनर और नई सोच ही सफलता की राह खोल देती है। देहरादून की काजल ने भी अपने बचपन के रुचि और सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा को अपनाकर ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है।

जी हां, सोशल मीडिया पर क्रोशिया और ऊन से बने क्राफ्ट की रील देखने के बाद काजल ने अपने पुराने शौक को फिर से शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी मां से बचपन में सीखी कला को निखारा और पढ़ाई के साथ-साथ छोटे स्तर पर हैंडीक्राफ्ट बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके डिजाइन लोगों को पसंद आने लगे और उनका यह शौक एक छोटे व्यवसाय में बदल गया।

काजल ऊन से हेयर क्लिप, हेयर बैंड, इयररिंग्स, की-चेन, बैग और खूबसूरत वूलन फ्लावर बुके तैयार करती हैं। इन फूलों की खास बात यह है कि ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और कभी मुरझाते नहीं हैं। उनके हाथों से बने उत्पाद आकर्षक होने के साथ-साथ बजट में भी उपलब्ध हैं।

हर शनिवार और रविवार को काजल देहरादून के गांधी पार्क के बाहर अपनी स्टॉल लगाती हैं। यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी उनके बनाए सामान खरीदते हैं। उन्होंने अपने सभी उत्पादों की कीमत ऐसी रखी है कि हर वर्ग का व्यक्ति इन्हें आसानी से खरीद सके। कम बजट में खास और यादगार उपहार देने के लिए उनके वूलन बुके लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

काजल बताती हैं कि उनके सभी उत्पादों में पोटली बैग की सबसे ज्यादा मांग रहती है। इसकी खासियत यह है कि इसे बैग की तरह प्रयोग करने के साथ-साथ उपहार के रूप में भी दिया जा सकता है। काजल की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सबसे जरूरी है अपने हुनर पर विश्वास और लगातार मेहनत। यदि रचनात्मक सोच के साथ अपने कौशल को सही दिशा दी जाए, तो एक छोटा-सा शौक भी रोजगार का माध्यम बनकर नई पहचान दिला सकता है।