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ऋषिकेश में महिलाओं की अनोखी पहल, फूल और सब्जियों से बनाएं प्राकृतिक रंग

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ऋषिकेश, उत्तराखण्ड

ऋषिकेश अपनी आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ अब महिलाओं की एक नई पहल के लिए भी चर्चा में है। यहां की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। जी हां, ऋषिकेश में महिलाओं का एक समूह फूलों, सब्जियों और पत्तियों से इको-फ्रेंडली और प्राकृतिक रंग तैयार कर रहा है। ये रंग पूरी तरह केमिकल फ्री हैं और त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। केमिकल रंगों से होने वाले नुकसान को देखते हुए लोग अब इन प्राकृतिक रंगों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिससे बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

इस पहल से जुड़ी ईशा कलूड़ा और उनके साथ की महिलाएं आसपास से फूल, पत्तियां और सब्जियां इकट्ठा करती हैं। पारंपरिक तरीकों से इनसे रंग निकाला जाता है। जैसे चुकंदर से लाल रंग, पालक, नीम और कढ़ी पत्ते से हरा रंग, जबकि गेंदा के फूल से पीला रंग तैयार किया जाता है।

रंग बनाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह प्राकृतिक है। पहले सामग्री को साफ किया जाता है, फिर उबालकर या पीसकर रंग निकाला जाता है। इसके बाद रंग को छानकर उसमें अरारोट मिलाया जाता है, जिससे वह पाउडर का रूप ले सके। फिर इसे धूप में सुखाकर अच्छी तरह छाना जाता है, ताकि रंग मुलायम और सुरक्षित बन सके। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता।

इन प्राकृतिक रंगों की सबसे विशेष बात यह है कि ये त्वचा में जलन या एलर्जी नहीं करते। स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी इन रंगों के ऑर्डर मिल रहे हैं। पैकेजिंग के अनुसार इनकी कीमत तय की जाती है, जो 30 रुपये से शुरू होती है। कम दाम, प्राकृतिक गुण और महिलाओं की मेहनत के कारण लोग इन रंगों को खूब पसंद कर रहे हैं।