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बरेली में 250 साल पुराने मंदिर में कब्जे के आरोप

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- हिंदू संगठनों ने प्रशासन से कब्जा मुक्त कराने की अपील 

- मंदिर से मूर्तियां हटाई गई, बंद हुई पूजा 

बरेली। बरेली के किला क्षेत्र के कटघर मोहल्ले में स्थित 250 साल पुराने गंगा महारानी मंदिर पर कब्जे का मामला सामने आया है। इस पर स्थानीय निवासी और हिंदू संगठनों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। आरोप है कि एक व्यक्ति वाहिद अली और उनके परिवार ने मंदिर पर कब्जा कर लिया है और वहां से मूर्तियों को हटा दिया गया है, जिसके चलते पूजा-अर्चना बंद हो गई है।

मंदिर का इतिहास -

गंगा महारानी मंदिर की स्थापना लगभग 250 साल पहले की गई थी। यह मंदिर क्षेत्र के हिंदू समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। मंदिर के निर्माणकर्ता परिवार के वंशज राकेश सिंह ने आरोप लगाया है कि वाहिद अली और उनके परिवार ने मंदिर में कब्जा कर लिया है। उन्होंने मंदिर की मूर्तियों को हटा दिया है और पूजा-अर्चना को रोक दिया गया है। घटना के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से मांग की कि मंदिर को मुक्त कराया जाए। उन्होंने जिलाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई है। वाहिद अली का कहना है कि वहां मंदिर जैसी कोई चीज़ कभी मौजूद नहीं थी। उनके मुताबिक, यह विवाद बेबुनियाद है।

1. प्रशासन की भूमिका:

     मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

     जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों ने विवादित स्थल का निरीक्षण करने की बात कही है।

     प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

2. संभल जैसी घटना से जुड़ाव:

     हाल ही में संभल में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां मंदिर परिसर पर अवैध निर्माण को लेकर विवाद हुआ था। बरेली की घटना को उससे जोड़कर देखा जा रहा है।

समाज में प्रतिक्रिया -

इस घटना ने स्थानीय समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न कर दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक आस्था पर हमला है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि विवादित स्थल पर पहले से कोई धार्मिक गतिविधि नहीं हो रही थी।

आगे की कार्रवाई -

1. जांच और सत्यापन:

प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि मंदिर पर कब्जे के आरोप सत्य हैं या नहीं।

2. सांप्रदायिक सौहार्द:

प्रशासन दोनों समुदायों के नेताओं के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

3. मीडिया और सामाजिक संगठनों की भागीदारी:

इस मामले को लेकर क्षेत्र में मीडिया और सामाजिक संगठनों की निगरानी बढ़ गई है।