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दिव्यांग होने के बावजूद नहीं मानी हार, मशरूम की खेती से बदला अपना जीवन

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अपने जज्बे के आगे अपनी शारीरिक अक्षमता को आड़े लाते हुए बस्ती जिले के विनोद ने खेती किसानी शुरु की और आज एक पैर पर चलकर वो मशरुम की खेती कर लाखों कमा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं एक पैर से दिव्यांग विनोद कुमार की, जिन्होंने बीएड करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। जहां उनको इतने कम पैसे मिलते थे कि इससे उनके परिवार का भरण पोषण भी नहीं हो पाता था।

इसलिए
थक हार कर शारीरिक अक्षमता के बाद भी उन्होंने खेती करने का निर्णय लिया तो सबने कहा कि यह दिव्यांग होकर कैसे खेती करेगा। लेकिन सभी प्रकार की आशंकाओं को दूर करते हुए उन्होंने मशरुम की खेती करने का निर्णय लिया। स्वयं पर विश्वास और लगातार कठिन परिश्रम के बल पर केवल वे सफल हुए बल्कि हर महीने हजारों रुपये की कमाई कर आत्मनिर्भर भी बन गए हैं। खेती में मिली सफलता से प्रसन्न विनोद बताते हैं कि दिव्यांग होने के कारण खेती करने में समस्या तो आती है, लेकिन घर परिवार चलाना है तो संकल्प तो करना ही पड़ेगा।

मशरूम
की खेती करने से पहले मैंने खेती से जुड़ी बारीकियों को समझा। आज वह और उनका मशरूम पूरे बस्ती में लोकप्रिय हो चुका है। विनोद कहते हैं कि वे 90 से 100 रुपये प्रतिकिलो की दर से मशरुम बेचते हैं। अच्छी गुणवत्ता के कारण उनके उगाए मशरुम की भारी मांग है जिसे बेचकर सालाना वह लाखों रुपये का व्यापार करते हैं। निसंदेह विनोद ने साबित कर दिखाया कि अगर जीतने का जज्बा हो तो उनके लिए दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है।