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भाई-बहनों ने मिलकर बिच्छू घास से बनाया लाखों का व्यवसाय

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भाई-बहनों ने मिलकर बिच्छू घास से बनाया लाखों का व्यवसाय



देवभूमि उत्तराखण्ड को यूँ ही देवभूमि नहीं कहा जाता। वहाँ की संस्कृति, वहाँ के संस्कार, वहाँ का खान-पान और वहाँ के विशेष औषधीय पौधे, हर चीज अपने आप में विशेष है। और इन्हीं विशेष चीजों को पूरे विश्व के सामने लाने के लिए न केवल राज्य सरकार अपितु केन्द्र सरकार भी पहाड़ के लोगों को स्वरोजगार स्थापित कर अपनी संस्कृति और पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली विशेष वस्तुओं को देश दुनिया तक पहुँचाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। 

इसी क्रम में एक खबर आई है उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से, जहाँ के रहने वाले अभिषेक घनसाला ने पहाड़ों में छिपे अनमोल खजाने को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

दरअसल पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले अभिषेक घनसाला ने अपने भाई-बहन के साथ मिलकर ‘कसेरा’ नाम की एक अनोखी पहल शुरू की है जिसका उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के साथ-साथ पलायन को रोकना, अपने गांवों को फिर से बसाना और स्थानीय लोगों को रोजगार देना है। इसके लिए वे बिच्छू घास अर्थात् कंडाली के साथ साथ विभिन्न औषधीय पौधों से उत्पाद बनाकर बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं।

‘कसेरा’ संस्था उत्तराखंड के पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली बिच्छू घास से पूरी तरह नेचुरल और केमिकल-फ्री शैम्पू तैयार कर रही है, जो बालों को मजबूत और घना बनाता है। इसकी कीमत ₹250 प्रति 100ml रखी गई है। इसके अतिरिक्त ‘कसेरा’ संस्था पहाड़ी लूण नामक पारंपरिक नमक और पारंपरिक ‘अरसे’ की मिठाई भी तैयार कर रही है, और इस काम के लिए संस्था स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रही है।

इस प्रकार कसेरा संस्था के माध्यम से अभिषेक और उनके भाई-बहन न केवल अपनी संस्कृति और क्षेत्रीय उत्पादों को देश – दुनिया तक पहुँचा रहे हैं बल्कि क्षेत्रीय लोगों को रोजगार देकर पलायन जैसी गम्भीर समस्या के समाधान की दिशा में भी काम कर रहे हैं।