नोएडा, उत्तर प्रदेश
नोएडा की एक संस्था उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। जी हां, नोएडा की संस्था चैलेंजर्स ग्रुप वंचित बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का काम कर रही है। संस्था की खास पहल ‘पाठशाला ऑन व्हील्स’ के तहत ई-रिक्शा और बस के जरिए स्लम बस्तियों में जाकर बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। ये कक्षाएं उन इलाकों में लगती हैं, जहां आसपास कोई स्कूल नहीं है। संस्था के अध्यक्ष प्रिंस शर्मा बताते हैं कि यह अभियान खोड़ा गांव, सादतपुर, चौड़ा गांव, सलारपुर गांव और गौर सिटी के आसपास चल रहा है। इस पहल से करीब 300 से ज्यादा बच्चे लाभ उठा रहे हैं। बच्चों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाती।
इस मोबाइल स्कूल की बस को पूरी तरह डिजिटल क्लासरूम बनाया गया है। इसमें स्मार्ट बोर्ड, लैपटॉप, पंखे, लाइट, टेबल और कुर्सियां मौजूद हैं। बस जहां भी जाती है, वहां दो से ढाई घंटे तक बच्चों को पढ़ाया जाता है। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामान्य ज्ञान के साथ-साथ कंप्यूटर की बेसिक जानकारी भी दी जाती है। उन्हें नोटपैड, वर्डपैड, एक्सेल और पावरपॉइंट जैसे टूल्स सिखाए जाते हैं। साथ ही नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति की जानकारी भी दी जाती है। कॉपी, किताब, पेन-पेंसिल और ड्रेस तक बच्चों को मुफ्त दी जाती है।
इस पूरी पहल को सफल बनाने में पांच से छह शिक्षक, एक ड्राइवर और एक हेल्पर लगातार मेहनत कर रहे हैं। संस्था पिछले नौ सालों से शिक्षा और जागरूकता से जुड़े कई कार्यक्रम चला रही है। इस पाठशाला में पढ़ने वाले कई बच्चे, जो पहले कभी स्कूल नहीं गए थे, अब पढ़ना-लिखना सीख रहे हैं। प्रवासी परिवारों के ये बच्चे अब समझने लगे हैं कि शिक्षा ही उनके भविष्य को बेहतर बना सकती है। बच्चों की आंखों में बढ़ता आत्मविश्वास और पढ़ाई के प्रति रुचि ही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।



