• अनुवाद करें: |
विशेष

अपने शब्दों से दिया समाज को स्वर

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

अपने शब्दों से दिया समाज को स्वर

लखनऊ निवासी शिल्पी सेन नारीवाद को पश्चिमी अवधारणा नहीं मानतीं। उनका मानना है कि नारीवाद की सबसे अधिक पोषक भारतीय संस्कृति और विचारधारा है। प्राचीन भारत की विदुषियां स्वतंत्र निर्णय लेती थीं और उनका स्वतंत्र व्यक्तित्व था। इसी दृष्टि से उन्होंने सीता तथा रामायण के स्त्री पात्रों पर व्याख्यान दिए हैं और महाराणा प्रताप की मां रानी जयवंता बाई पर तथ्यपरक लेख लिखकर बताया कि किस प्रकार उन्होंने महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व को गढ़ा। संस्कृति और राष्ट्रवाद पर भी शिल्पी सेन ने लगातार काम किया है। अयोध्या को 2005 के बाद से लगातार कवर करते हुए उन्होंने रामकथा और रामायण के पात्रों पर विभिन्न मंचों पर व्याख्यान दिए।

कुछ यात्राएँ केवल करियर नहीं बनातीं, वे अपने पीछे एक विचार छोड़ जाती हैं। शिल्पी सेन की पत्रकारिता की यात्रा भी ऐसी ही है, जहाँ दो दशक से अधिक की सक्रिय पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को निरंतर अपनी आवाज़ देती रही। शिल्पी सेन का जन्म कोलकाता में हुआ, लेकिन परिवार के लखनऊ में पीढ़ियों से बसे होने के कारण उनकी शिक्षा लखनऊ में हुई। मातृभाषा बांग्ला होने और अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ाई के बावजूद उन्होंने हिंदी में ही काम शुरू किया। वे मानती हैं कि भारत अपनी विविधता के साथ ही एकता के लिए जाना जाता है। इसलिए बांग्ला मातृभाषा है तो हिंदी को वे अपनी मातृभूमि की भाषा होने की वजह से ‘दूसरी मातृभाषा’ मानती हैं। 

शिल्पी सेन का टेलीविजन सफर लखनऊ दूरदर्शन में बच्चों के कार्यक्रम से शुरू हुआ। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एंकरिंग शुरू कर दी थी। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और परास्नातक परीक्षाओं में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने के कारण परिवार चाहता था कि वे प्रशासनिक सेवा में जाएँ, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता को अपना कैरियर बनाया। लखनऊ विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 2001 में हिंदुस्तान समाचार पत्र में ट्रेनी कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़ीं। इसके बाद सहारा समय न्यूज चैनल में रिपोर्टर के रूप में पहचान बनी। उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप के आजतक, गुड न्यूज टुडे और यूपी तक में कार्य किया। महाकुंभ 2025 से पहले नेटवर्क 18 डिजिटल के ‘महाकुंभ चैनल’ से जुड़कर उन्होंने महाकुंभ को कवर किया। वर्तमान समय में उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर भी रुख किया और ‘द फेडरल न्यूज’ में उत्तर प्रदेश संपादक के तौर पर कार्य किया।

करीब 24 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता कर रहीं शिल्पी सेन की सबसे बड़ी ताक़त ग्राउंड रिपोर्टिंग है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 65 जिलों में राजनीतिक, सामाजिक, चुनाव और बड़े घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की है। वर्ष 2012-2014 में सहारा समय के महिला चैट शो ‘वामा वीथिका’ में एंकरिंग की, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होती थी।

जेंडर इश्यूज और राष्ट्रवाद उनकी रुचि के प्रमुख क्षेत्र हैं। उन्हें UNFPA समर्थित लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनकी फीचर स्टोरी में मलिहाबाद की ग्रामीण महिलाओं की कंप्यूटर सीखने में रुचि और ‘डिजिटल इंडिया’ की कामयाबी को बताया गया था। राष्ट्रीय महिला आयोग के जागरूकता अभियानों में वे रिसोर्स पर्सन रही हैं और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा भी सम्मानित हुई हैं।

संस्कृति और राष्ट्रवाद पर भी शिल्पी सेन ने लगातार काम किया है। अयोध्या को 2005 के बाद से लगातार कवर करते हुए उन्होंने रामकथा और रामायण के पात्रों पर विभिन्न मंचों पर व्याख्यान दिए। अयोध्या में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ‘सीता राम विवाह संवाद’ तथा प्रयागराज के ‘कुंभ कॉन्क्लेव’ में वे वक्ता रहीं। उनका मानना है कि धर्म और आध्यात्म सुशासन में बाधक नहीं, बल्कि सुशासन के पूरक हैं।

अपनी पत्रकारिता के लिए वे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से चार बार सम्मानित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त राज्य महिला आयोग का उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार, हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार, पी.डी. टंडन अवार्ड फॉर जर्नलिज्म, UN लाडली मीडिया अवार्ड फॉर जेंडर सेंसिटिविटी और राष्ट्रीय एकता मिशन पुरस्कार सहित कई सम्मान उन्हें प्राप्त हुए हैं।