अयोध्या, उत्तर प्रदेश
राम मंदिर निर्माण और शहर के विकास के बाद यहां श्रद्धालुओं और
पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका सकारात्मक असर अब बड़े कारोबारियों के
साथ-साथ छोटे दुकानदारों की आमदनी पर भी दिखाई देने लगा है। दीपोत्सव से पहले ही
घाटों पर लगने वाली दुकानों की बिक्री बढ़ गई है और छोटे कारोबारियों के चेहरे खिल
उठे हैं।
घाटों पर बढ़ी भीड़,
दुकानदारों की बढ़ी कमाई
राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर दीपोत्सव की तैयारियां देखने के
लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। परिवार के साथ घूमने आए लोग चाय, समोसे और झालमुड़ी का आनंद ले रहे हैं।
इससे घाटों पर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदारों को अच्छा कारोबार मिल रहा है।
दुकानदारों के अनुसार, सामान्य दिनों में उनकी रोजाना कमाई
800 से 1,000 रुपये के आसपास रहती थी, लेकिन इन दिनों यह बढ़कर 2,800 से
3,200 रुपये तक पहुंच गई है। यानी उनकी आमदनी करीब तीन गुना हो गई है।
30 लाख दीपों से जगमगाने की तैयारी
अयोध्या में इस बार 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। राम की पैड़ी से लेकर आसपास के घाटों तक दीपोत्सव की भव्य तैयारियां चल रही हैं। शाम होते ही घाटों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगती है। इससे छोटे दुकानदारों को मुख्य आयोजन से पहले ही अच्छी कमाई का अवसर मिल रहा है। आयोजन के मुख्य दिन 7 नवंबर को श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय दुकानदारों को और बेहतर कारोबार मिलने की संभावना है।
अयोध्या के विकास से स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटन को नई गति मिली है। शहर में सड़क, परिवहन, होटल और अन्य सुविधाओं का विस्तार होने से यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसका लाभ केवल बड़े होटल और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को ही नहीं, बल्कि चाय बेचने वाले, समोसे की दुकान लगाने वाले और छोटे रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को भी मिल रहा है। दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अयोध्या की बढ़ती रौनक अब छोटे दुकानदारों के घरों में भी खुशहाली लेकर आ रही है।



