भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, आईएनएस दूनागिरी, संशोधक और अग्रय हुए शामिल
भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति को और मजबूत करते हुए तीन स्वदेशी युद्धपोतों-आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय-को बेड़े में शामिल किया। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्मित ये तीनों आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा निर्माण की बड़ी उपलब्धि है
प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित आईएनएस दूनागिरी एक अत्याधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक रडार और एंटी-सबमरीन हथियारों से लैस है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है। लगभग 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत समुद्र, हवा और पानी के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। इसका नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत पर रखा गया है, जिसे पौराणिक कथाओं में हनुमान जी से जोड़ा जाता है।
आईएनएस संशोधक भारतीय नौसेना का चौथा सर्वे वेसल (लार्ज) है। यह युद्धपोत सीधे युद्ध में भाग नहीं लेता, लेकिन समुद्री सुरक्षा के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य कार्य समुद्र की गहराई का अध्ययन, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री नक्शों का निर्माण तथा नौवहन मार्गों की जानकारी जुटाना है। आधुनिक सर्वेक्षण प्रणालियों और स्वायत्त जलमग्न वाहनों से लैस यह पोत समुद्री अनुसंधान और रणनीतिक योजना में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इसके नाम के अनुरूप यह भारत की वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान परंपरा का प्रतीक माना जा रहा है।
आईएनएस अग्रय अर्णाला श्रेणी का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसे विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, उन्नत सोनार प्रणाली और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इसका प्रतीक चिह्न महाभारत के अर्जुन के प्रसिद्ध गांडीव धनुष से प्रेरित है, जो इसकी सटीक मारक क्षमता को दर्शाता है।
इन तीनों युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और प्रणालियां शामिल हैं। इनके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई और भारतीय उद्योगों की भागीदारी रही है। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
आईएनएस
दूनागिरी, संशोधक और अग्रय का नौसेना में
शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा, ब्लू-वॉटर क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में
रणनीतिक उपस्थिति को नई मजबूती देगा। ये युद्धपोत केवल सैन्य शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती
तकनीकी और औद्योगिक क्षमता के भी प्रमाण हैं।



