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भोजशाला मामले पर न्यायालय के निर्णय के मुख्य बिन्दु…

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इंदौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खण्डपीठ ने भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय सुना दिया। न्यायालय ने परिसर को मां वाग्देवी (मां सरस्वती) के मंदिर सहित भोजशाला माना है। न्यायालय के निर्णय के संबंध में महाधिवक्ता प्रशान्त सिंह के कार्यालय से एक विज्ञप्ति जारी की गई है, जिसमें निर्णय के संबंध में जानकारी दी गई है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खण्डपीठ ने भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद से संबंधित विभिन्न याचकिाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए रिट याचिका नंबर 10497/2022 एवं रिट याचिका नंबर 10484/2022 को स्वीकार कर लिया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में निम्न प्रमुख निर्देश जारी किए हैं –

  1. माननीय न्यायालय ने यह घोषित किया है कि “भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद का विवादित परिसर 18 मार्च 1904 से 1958 के अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित स्मारक है।
  2. न्यायालय ने विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप को ‘माता वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर सहित भोजशाला’ माना है।
  3. आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया (एएसआई) के निर्देशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को पारित आदेश के उस भाग को अपास्त कर दिया गया है, जिसमें हिन्दू समुदाय के पूजा-अधिकारों को सीमित किया गया था तथा मुस्लिम समुदाय को नमाज़ की अनुमति प्रदान की गई थी।
  4. भारत सरकार एवं एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आदेशित किया है कि एएसआई सम्पूर्ण परिसर के संरक्षण, प्रबंधन एवं धार्मिक गतिविधियों के विनियमन की सर्वोच्च निगरानी संस्था बनी रहेगी।
  5. न्यायालय ने एएसआई को संरक्षण, संवर्धन एवं धार्मिक प्रवेश के नियमन पर पूर्ण पर्यवेक्षणीय अधिकार प्रदान किए हैं।
  6. लंदन संग्रहालय में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाकर भोजशाला परिसर में पुनः स्थापित करने संबंधी मांग पर न्यायालय ने कहा कि भारत सरकार प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विधिसम्मत विचार कर सकती है।
  7. मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष धार जिले में मस्जिद अथवा नमाज़ स्थल निर्माण के लिए भूमि आबंटन का आवेदन प्रस्तुत करता है, तो राज्य सरकार विधि अनुसार उपयुक्त एवं स्थायी भूमि आबंटन पर विचार कर सकती है।
  8. माननीय न्यायालय ने हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं कुलदीप तिवारी द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार किया, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, काजी जकुल्लाह एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाएँ एवं अपीलें निरस्त कर दी गई।
  9. माननीय न्यायालय ने सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा गरिमापूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में की गई वहस की सराहना की।

यह निर्णय भोजशाला प्रकरण में लंबे समय से चले आ रहे विवाद के न्यायिक निष्कर्ष के रूप में देखा जा रहा है और इससे संबंधित प्रशासनिक एवं धार्मिक व्यवस्थाओं के लिए नई दिशा निर्धारित होने की संभावना है।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशान्त सिंह तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव, अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेन्द्र सिंह परमार, अतिरिक्त महाधिवक्ता आशीष यादव, अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता, उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव, उप महाधिवक्ता श्रेयराज सक्सेना, उप महाधिवक्ता स्वपनिल गांगुली, उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।