• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

युवा पीढ़ी को साहस, कर्मशीलता, त्याग और शौर्य के बल पर स्वयं को तैयार करना होगा

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

नागपुर

नागपुर के ऐतिहासिक कस्तूरचंद पार्क में 200 फीट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक कस्तूरचंद पार्क मैदान में नागपुर महानगरपालिका के सहयोग से ‘लोकमत’ समाचार समूह द्वारा स्थापित 200 फीट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर राष्ट्रध्वज का ध्वजारोहण सरसंघचालक जी ने किया। विशेष कार्यक्रम में ‘भारत के उज्ज्वल भविष्य में युवाओं का योगदान’ विषय पर मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर ‘लोकमत’ एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन तथा पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. विजय दर्डा और महापौर नीता ठाकरे उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत के पास मौजूद विशाल युवा आबादी केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस ‘डेमोक्रेटिक डिविडेंड’ का सही उपयोग किया जाए तो भारत विश्वगुरु बन सकता है। इसके लिए युवा शक्ति को उचित दिशा, कौशल और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। युवाओं को केवल अपने भविष्य के बारे में न सोचते हुए देश और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में देश के सामने सबसे बड़ा अवसर उसकी युवा आबादी है। अनेक पीढ़ियों ने देश के लिए त्याग किया, जिसके कारण आज की पीढ़ी स्वतंत्रता का आनंद ले रही है। अब आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। युवाओं में ऊर्जा, सपने और कुछ अलग करने की ललक होती है। दुनिया के संघर्षों का पर्याप्त अनुभव नहीं होने के कारण उनमें आशावाद भी अधिक होता है। इस ऊर्जा को सही दिशा देना और राष्ट्र निर्माण में उसका उपयोग करना आवश्यक है। युवाओं को अपनी क्षमता पर विश्वास रखते हुए बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ताकत से जुट जाना चाहिए।

मोहन भागवत जी ने कहा कि युवा आबादी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। हालांकि यह अवसर अपने आप विकास में परिवर्तित नहीं होगा। शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, रोजगार सृजन और राष्ट्रहित की भावना के माध्यम से ही ‘डेमोक्रेटिक डिविडेंड’ को राष्ट्रीय शक्ति में बदला जा सकता है। रोजगार का अर्थ केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं है। उद्योग और व्यवसाय में जोखिम होते हैं और युवाओं में इन जोखिमों का सामना करने का साहस होना चाहिए। स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ ही दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की मानसिकता भी विकसित होनी चाहिए। देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में युवाओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

भारत को दूसरों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए

भारत को अमेरिका, चीन या ऑस्ट्रेलिया से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी संस्कृति, मूल्यों और आवश्यकताओं के आधार पर विकास की दिशा तय करनी चाहिए। दुनिया आज अधूरी दृष्टि के कारण संघर्ष कर रही है। ऐसे में दुनिया को आगे का मार्ग दिखाने की जिम्मेदारी भारत की है। इसके लिए युवा पीढ़ी को साहस, कर्मशीलता, त्याग और शौर्य के बल पर स्वयं को तैयार करना होगा। देश की प्रतिष्ठा और सुरक्षा को मजबूत करने में युवाओं को आगे आना चाहिए।


विरोध करें, लेकिन संविधान का ध्यान रखें

लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और विरोधी दृष्टिकोण होना स्वाभाविक है। सवाल मजबूती से उठाना, आंदोलन करना और विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन ऐसा करते समय संविधान और उसकी मर्यादाओं का ध्यान रखना जरूरी है। अपने कानून, संविधान, प्राचीन संस्कृति, संस्कार और शील को नुकसान न पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को निभानी चाहिए। मतभेद होने के बावजूद मन में वैमनस्य नहीं होना चाहिए। विविधता में एकता और सहचित्त का निर्माण करना ही तिरंगे में मौजूद धम्मचक्र का संदेश है।