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देशभक्ति गीत मन में राष्ट्रकार्य में सहभागी होने की प्रबल प्रेरणा जगाते हैं - शांता कुमारी जी

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पुणे 

स्वारगेट स्थित गणेश कला क्रीडा रंगमंच में ‘राष्ट्रभक्ति का चिरंतन प्रवाह’ शीर्षक से आयोजित संगीतमय कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी ने कहा कि भारतीय संगीत से मन को शांति और संतोष प्राप्त होता है, साथ ही व्यक्तित्व में सकारात्मकता पैदा होती है। देशभक्ति के गीत हर एक के मन में राष्ट्रकार्य में सहभागी होने की प्रबल प्रेरणा जगाते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष तथा राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षपूर्ति के अवसर पर दोनों संगठनों की समांतर यात्रा को दर्शाने वाला विशेष कार्यक्रम ‘आकार’ संस्था की ओर से प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी, महापौर मंजुषा नागपुरे, प्रांत संघचालक प्रा. नाना जाधव, ‘आकार’ की संस्थापिका चित्रा देशपांडे, अभिनेता अभिजित खांडकेकर, सुखदा खांडकेकर, हिन्दू गर्जना प्रतिष्ठान के अध्यक्ष धीरज घाटे सहित अन्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में ‘चरैवेती चरैवेती यही तो मंत्र है अपना’, ‘निर्माणों के पावन युग में’ और ‘हम करें राष्ट्र आराधन’ जैसे स्फूर्तिदायी देश भक्ति गीतों ने वातावरण राष्ट्रभक्ति से अभिभूत कर दिया। संगीत में प्रवाह के विषय में चित्रा देशपांडे ने कहा कि संघ और समिति की सुदीर्घ और ध्येयवादी यात्रा को संगीत के रूप में प्रस्तुत करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे ‘आकार’ ने सफलता से पूरा किया।

महापौर मंजूषा नागपुरे ने कहा, “यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक जागृति का गौरवमयी अध्याय है। राष्ट्र सेविका समिति ने स्त्री को केवल गृहस्थी तक सीमित न रखते हुए उसे राष्ट्रनिर्मात्री के रूप में ढाला है और भारतीय स्त्री का स्वाभिमान सच्चे अर्थों में जागृत रखा है।”

रेत के शिल्प द्वारा प्रभावी प्रस्तुति करने वाली छात्राएं आकांक्षा कोल्हे और वैष्णवी मोरे को समारोह में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की संकल्पना श्रीकांत कोठे और आनंद कुलकर्णी की थी। सूत्र संचालन कल्पेश कुलकर्णी ने किया।