• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

CSR निधि में कला गतिविधियों को मिले प्राथमिकता, संस्कार भारती ने पारित किया प्रस्ताव

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

आगरा, उत्तर प्रदेश

संस्कार भारती की अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी की दो दिवसीय बैठक (11–12 अप्रैल) आगरा में संपन्न हुई। देश के 11 क्षेत्रों से आए 49 वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में विविध लोक कला शैलियों पर आधारित विशेष प्रस्तुतियों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही संत रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती वर्ष को समर्पित व्यापक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई।

कला एवं संस्कृति को सशक्त बनाने हेतु CSR निधि में प्राथमिकता देने के विषय पर गंभीर मंथन हुआ तथा इसके लिए प्रस्ताव पारित किया गया। Corporate Social Responsibility (CSR) निधि के विनियोग में कला गतिविधियों को प्राथमिकता मिले,  बैठक में पारित इस प्रस्ताव में कहा गया कि कलाएं भारत की सौम्य शक्ति हैं। भारतीय कलाएं भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को भी सुनिश्चित करती हैं। इस दृष्टि से कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए CSR निधि का अधिक उपयोग होने से समाज, भौतिक विकास के साथ ही, समावेशी, शाश्वत्, सांस्कृतिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकेगा।

साथ ही केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की गुरु-शिष्य परंपरा आधारित Repertory Grant योजना में आई अनियमितताओं पर चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही हेतु सहमति बनी। इस अवसर पर “सौहार्द” कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। बैठक में पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी स्वांतरंजन जी की विशेष उपस्थिति रही।संस्कार भारती निरंतर भारतीय कला, संस्कृति और मूल्यों के संवर्धन हेतु समर्पित है।