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स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता: बद्रीनाथ में प्लास्टिक कचरे से हो रही कमाई

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चमोली, उत्तराखण्ड

आस्था, प्रकृति और जिम्मेदारी - इन तीनों का सुंदर संगम अगर कहीं देखने को मिलता है, तो वह है बद्रीनाथ मंदिर। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने वाला यह धाम अब स्वच्छता और नवाचार का भी एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है।

यहां नगर पंचायत ने प्लास्टिक कचरे जैसी बड़ी चुनौती को अवसर में बदलते हुए एक ऐसी पहल की है, जो न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देती है, बल्कि आय का नया रास्ता भी खोलती है।

बीते वर्ष जहां लगभग 230 टन कचरे का निस्तारण किया गया था, वहीं इस वर्ष चारधाम यात्रा शुरू होने के केवल एक सप्ताह के भीतर ही 8 टन अजैविक कचरे को प्रोसेस कर 84 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की गई है। धाम की स्वच्छता की जिम्मेदारी नगर पंचायत बदरीनाथ निभा रही है, जो पैदल मार्गों, सड़कों और शौचालयों की नियमित सफाई के साथ कचरा प्रबंधन को भी व्यवस्थित तरीके से संचालित कर रही है।

इस पहल के तहत जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग किया जाता है। पर्यावरण मित्रों की मदद से जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है, जबकि प्लास्टिक कचरे को ब्लॉक में बदलकर उसका उपयोग और विपणन किया जा रहा है।


इस नवाचार से न केवल धाम की स्वच्छता में सुधार हुआ है, बल्कि नगर पंचायत की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। इस आय का उपयोग स्थानीय संसाधनों के विकास और अन्य जरूरी कार्यों में किया जा रहा है। बदरीनाथ का यह मॉडल अब अन्य नगर पालिकाओं के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है, जो स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।