जम्मू
गैलक्सी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सैनिक कॉलोनी में भारत तिब्बत सहयोग मंच की दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक एवं “विचार गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “21वीं सदी में हिमालय: भारत की सुरक्षा, चुनौतियां और उभरते आयाम” था, जिसमें देशभर से प्रबुद्धजनों, नीति-निर्माताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिमालय के सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व पर चर्चा की।
भारत तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार जी ने हिमालय को भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि इसके पारिस्थितिक, सांस्कृतिक या सामरिक संतुलन को बिगाड़ने का कोई प्रयास भारत की संप्रभुता के लिए चुनौती है। उन्होंने विस्तारवादी प्रवृत्तियों के विरुद्ध राष्ट्रीय एकता, स्पष्ट नीतियां, सीमावर्ती विकास एवं सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य रूपेश कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संगठन के कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही कार्यकर्ताओं से संगठन के विस्तार और नवीन योजनाओं और कार्यक्रमों द्वारा जन जन तक पहुंचने का आह्वान किया।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के पूर्व शिक्षा मंत्री थुपटेन लुंगरिंग ने भू-राजनीतिक परिवर्तनों पर चिंता जताते हुए कहा कि हिमालय की कोई हलचल एशिया की शांति प्रभावित करती है, तथा सहयोग एवं जागरूकता ही समाधान है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री पंकज गोयल ने संगठन विस्तार एवं आगामी कार्यक्रमों की योजनाबद्धता पर दिशा-निर्देश दिए।
अध्यक्षता करते हुए ले. जनरल आर.के. शर्मा (सेवानिवृत्त) ने सामरिक तैयारी, पर्यावरण संवेदनशीलता एवं सामाजिक जागरूकता के समन्वित दृष्टिकोण पर जोर दिया।
भारत तिब्बत सहयोग मंच का राष्ट्रीय अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल शिवकुमार शर्मा को नियुक्त किया गया। दो दिवसीय मंथन में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण एवं नीति-निर्माण पर सार्थक चर्चा हुई, जो संगठन विस्तार, संचालन गति एवं जागरूकता सशक्तिकरण के संकल्प के साथ समाप्त हुआ।



