पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड
करीब छह वर्षों की लंबी प्रतिक्षा के
बाद भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से होने वाला पारंपरिक सीमा व्यापार फिर से
प्रारंभ हो गया है। इससे उत्तराखण्ड के सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर पिथौरागढ़ जिले के व्यापारियों और
स्थानीय लोगों में खुशी और नई उम्मीद जगी है।
जी हां, हाल ही में भारतीय व्यापारियों का पहला
दल उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे से तिब्बत के तकलाकोट (पुरांग)
पहुंचा। फिलहाल चीन ने 20
भारतीय व्यापारियों को व्यापार की अनुमति
दी है। यह व्यापार वर्ष 2020
में कोविड-19 महामारी के कारण बंद
हो गया था। इस वर्ष इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन चीनी क्षेत्र में नए बाजार और
गोदाम के निर्माण के कारण कुछ देरी हुई। अब दोनों देशों के सहयोग से व्यापार की
शुरुआत हो गई है।
प्रशासन के अनुसार अब तक 155 ट्रेड पास जारी किए गए हैं, जिनमें 62 व्यापारी और 93 सहायक शामिल हैं। सभी व्यापारियों की
जानकारी पहले ही चीनी अधिकारियों को भेज दी गई थी।
यह व्यापार मार्ग धारचूला, गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए लिपुलेख
दर्रे से तिब्बत के तकलाकोट तक जाता है। इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले
सामान खच्चरों और याक के माध्यम से ले जाया जाता था, जबकि अब धारचूला-लिपुलेख सड़क बनने से
अधिकांश सामान सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचाया जा रहा है।
सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने से
पिथौरागढ़ और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की
उम्मीद है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और
भारत-तिब्बत के पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। यह पहल सीमांत
क्षेत्रों के विकास और लोगों की आजीविका के लिए एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।



