अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड
शिक्षा के माध्यम से
जरूरतमंद बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा रहीं अल्मोड़ा की दो युवा
बहनें। जी हां, रीतिका बिष्ट और कृतिका बिष्ट आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर
परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर वे न केवल उनका भविष्य संवारने का प्रयास
कर रही हैं, बल्कि समाज के सामने सेवा, संवेदनशीलता और
जिम्मेदारी की एक प्रेरणा भी प्रस्तुत कर कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अल्मोड़ा के हीरा डुंगरी स्थित पैलाग
फाउंडेशन की डायरेक्टर रीतिका बिष्ट और कृतिका बिष्ट का उद्देश्य है कि कोई भी
बच्चा केवल पैसों या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उनकी इस पहल
के माध्यम से अब तक 70 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका
है।
फाउंडेशन बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को
निखारने और उन्हें खेलकूद और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने का काम भी कर रहा
है। संस्था के छह से अधिक सदस्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सहयोगियों के साथ
मिलकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयास कर रहे हैं।
पैलाग फाउंडेशन ने वर्ष 2025 में प्राथमिक विद्यालय बल्टा को गोद
लिया। यहां 16 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न गतिविधियों से
जोड़ा जा रहा है। संस्था बच्चों की शिक्षा के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर भी
ध्यान दे रही है।
इसके अलावा जूनियर हाईस्कूल बल्टा के विद्यार्थियों को भी शैक्षणिक सहयोग दिया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय बल्टा की प्रधानाध्यापिका हेमलता पांडे और शिक्षक अर्जुन सिंह बिष्ट के अनुसार, फाउंडेशन की पहल से जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में मदद मिल रही है। कई विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय भी दिया है।
फाउंडेशन की ओर से अल्मोड़ा के राजपुर क्षेत्र में भी शिक्षा के
क्षेत्र में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यहां 50 से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर
बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके शैक्षणिक विकास में सहयोग देने का काम किया जा
रहा है।
रीतिका बिष्ट और कृतिका बिष्ट की यह पहल बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है एक अच्छी सोच और कुछ कर गुजरने का जज्बा।
आज के युवा ही देश का भविष्य हैं। जब युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का
उपयोग दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने में करते हैं, तो एक शिक्षित, जागरूक
और मजबूत समाज की नींव तैयार होती है। अल्मोड़ा की इन दोनों बहनों का प्रयास इस बात
का उदाहरण है कि युवा शक्ति अगर सही दिशा में आगे बढ़े, तो
जरूरतमंद बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी लाई जा सकती है।



