जबलपुर
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की तीन दिवसीय बैठक सरस्वती शिक्षा परिषद परिसर, शास्त्री पुल, जबलपुर में प्रारम्भ होगी, जिसमें सम्पूर्ण देश के सभी राज्यों से प्रतिभागी भाग लेंगे। डॉ. रविन्द्र कान्हेरे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अखिल भारतीय महामंत्री देशराज जी शर्मा, विवेक शेंडे जी सहित प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
विद्या भारती की तीन दिवसीय बैठक में संगठनात्मक विषयों के साथ-साथ विद्यालय शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण तथा देश में शिक्षा प्रणाली के सामने उपस्थित चुनौतियों पर चिन्तन होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी तीनों दिन बैठक में उपस्थित रहेंगे। बैठक से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में महामंत्री देशराज शर्मा जी ने कहा कि हमारा मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता, संस्कार, कौशल और राष्ट्रबोध, इन चारों को साथ लेकर ही शिक्षा राष्ट्रीय बन सकती है जो विश्व की समस्याओं के समाधान तथा विकास में सहायक बनेगी।
बैठक में विद्यालयों की गुणवत्ता के स्पष्ट और मापनीय मानक विकसित करने पर विचार होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान परम्परा, मातृभाषा, कौशल, अनुभवात्मक शिक्षा और पंचकोशीय समग्र विकास पर बल दिया है। विद्या भारती इन प्रवधानों को विद्यालय व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कार्य कर रही है, उसका भी अवलोकन किया जाएगा। विद्या भारती का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि भारतीय ज्ञान परम्परा आधुनिक ज्ञान और तकनीक का विरोध नहीं है, बल्कि उसके साथ भारतीय जीवन दृष्टि का समन्वय करना है। विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान से सक्षम और अपनी जड़ों से जुड़ा होगा, तभी भारत विश्व की प्रगति एवं शांति में सहायक बनेगा।
बैठक में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए कैरियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास एवं व्यक्तित्व विकास आदि विषयों पर चिन्तन करेंगे। शिक्षा परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षक है, इसलिए शिक्षक को केवल विषय अध्यापक नहीं उसे प्रेरक, मार्गदर्शक, सहयोगी और चरित्र निर्माता के रूप में विकसित करना आवश्यक है, इसकी पूर्ति के लिए कार्यकारिणी के सदस्य शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम, माड्यूल पर विचार करेंगे तथा आगामी योजना का रोड मैप बनाएँगे।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती के विद्यालयों के बोर्ड परीक्षा परिणाम बहुत ही सराहनीय हैं। इन तीन दिनों में परीक्षा परिणामों का आकलन, चर्चा, निदानात्मक परीक्षण, विषयवार कठिनाइयों की पहचान, व्यक्तिगत मार्गदर्शन, विद्यार्थीयों की अध्ययन पद्धति आदि परिणामपरक नीतियों पर विचार किया जाएगा। उत्तम संसाधनों को उत्तम परिणामों का सहायक मानते हुए AI और डिजिटल तकनीक पर महत्वपूर्ण विचार विमर्श होगा। हमारा विद्यार्थी तकनीक का उपभोक्ता नहीं, अपितु उसका रचनात्मक उपयोग करने वाला बने, ऐसी नीति बैठक में तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विद्या भारती 24000 औपचारिक एवं अनौपचारिक विद्यालयों का संचालन कर रही है। अत: शिक्षा को युगानुकूल, राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप, सर्वस्पर्शी एवं समावेशी बनाने के लिए विचार विमर्श होगा। महानगरों, नगर निगमों, नगर पालिकाओं में शिक्षा व्यवस्था में विद्या भारती का योगदान विषय पर चर्चा होगी। दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक आधुनिक संसाधन एवं स्थानीय संस्कृति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा के अध्ययनों की रिपोर्ट पर विचार किया होगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना ही नहीं होना चाहिए, यह विद्यार्थियों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहायक बने, इसलिए कौशल एवं रोजगार को ध्यान में रखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, उद्यमिता, नवाचार तथा तकनिकी दक्षता पर बल देने के लिए पहले से ही तैयार कार्य नीति का विश्लेषण करेंगे।
उन्होंने कहा कि अपने देश सहित विश्व भर में हमारे पूर्व छात्र भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान का संवाहक बने हुए हैं। इन पूर्व छात्रों के कार्य तथा उनके द्वारा समाज सेवा, भारतीय शिक्षा में योगदान आदि पर विचार होगा। पूर्व छात्रों के संख्यात्मक डेटा और उपलब्धियों की जानकारियों का आदान-प्रदान भी करेंगे। देश भर की शिक्षा को समृद्ध करने के लिए हम 28 विषयों पर कार्य कर रहे हैं, इनमें इस वर्ष महिला आयाम को भी जोड़ा गया है। ऐसे कुल 29 विषयों की देश भर में स्थिति का आकलन तथा उनके परिणामों पर विचार किया जाएगा।
परिवर्तित विश्व के संदर्भ में शिक्षा और भारत की भूमिका को ध्यान में रखकर विद्यालयों को मात्र पर्यावरण पढ़ाने वाला नहीं, अपितु दीर्घकालिक प्रयोगशाला बनाने पर मंथन किया जाएगा। हमारे विद्यालयों में पांच आधारभूत विषयों शारीरिक शिक्षा, योग शिक्षा, संगीत शिक्षा, संस्कृत शिक्षा व नैतिक एवं अध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से शिक्षा में भारतीयता का समावेश करते हुए विश्व के लिए मॉडल सिद्ध हो रहे हैं। इन विषयों का भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुरूप एवं वैश्विक दृष्टि से पाठ्यक्रम बने, यह भी इस बैठक का हिस्सा होगा।
उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर 2026 को वन्देमातरम् के 150वें वर्ष को समर्पित एक स्वर, एक लय, एक समय में करोड़ों लोग राष्ट्रगीत का गायन करेंगे। इस कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, अभिलेख आदि को अंतिम रूप कार्यकारिणी में दिया जाएगा। 1952 से शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाली विद्या भारती का 2027 वर्ष अमृतमहोत्सव है, अत: इसकी संचालन समितियों एवं कार्यक्रम भी बैठक में तय होंगे।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती अपने लक्ष्य अनुसार ऐसी शिक्षा प्रदान कर रही है, जिसमें विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़ा हो, दृष्टि आधुनिक हो, ज्ञान में सक्षम हो, कौशल में दक्ष हो, चरित्र में दृढ़ हो और राष्ट्र एवं समाज के प्रति संवेदनशील हो। इसके क्रियान्वयन एवं परिणामों की समीक्षा होगी, जिससे भारत को ज्ञान सम्पन्न, आत्मनिर्भर और संस्कारित राष्ट्र बनाने में योगदान दिया जा सके।



