लखनऊ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप
से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार
का उद्देश्य 3 करोड़ महिलाओं को
स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना और 1
करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है। इसके लिए महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें रोजगार से जोड़ने और आसान ऋण
उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने
योजना भवन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे कार्यों की
समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महिला समूहों को केवल योजनाओं का लाभ देने तक सीमित न
रखा जाए, बल्कि उनकी आमदनी
बढ़ाने और उन्हें सफल उद्यमी बनाने पर ध्यान दिया जाए।
महिला उद्यमियों को मिलेगा आसान आर्थिक
सहयोग
उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी योजना के तहत एक करोड़ से अधिक महिलाओं को पहली किश्त में 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस राशि का ब्याज सरकार वहन करेगी। इसके बाद 30 हजार रुपये की दूसरी किश्त उपलब्ध कराई जाएगी। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र महिलाओं को बिना अनावश्यक परेशानी के आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जाए। महिलाओं को गाय-भैंस खरीदने के लिए ऋण देने और महिला समूहों को दो लाख रुपये तक के ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
तकनीक से बढ़ेगी महिलाओं की कमाई
महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। हर संकुल स्तरीय संघ के पास कम से कम एक ड्रोन उपलब्ध कराने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और दूसरे आर्थिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी और अवसर बढ़ सकते हैं। बैठक में एचसीएल संस्था ने स्मार्ट स्कूल, स्वास्थ्य और समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। संस्था फिलहाल प्रदेश के 13 जिलों में काम कर रही है। सरकार की इस पहल का लक्ष्य साफ है, महिलाओं को सहायता लेने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और कारोबार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने वाला बनाना।



