चित्रकूट
मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट के जनजीवन को प्रभावित किया है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोग अपने घरों और दुकानों को संभालने में जुटे ही थे कि दोबारा बारिश शुरू हो गई। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को फिर से जलस्तर बढ़ने की आशंका सताने लगी है। साथ ही बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पीने के साफ पानी और कपड़ों तक की समस्या सामने आ रही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हुआ है।
ऐसी विषम परिस्थिति के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 500 से अधिक स्वयंसेवक राहत एवं सेवा कार्यों में सक्रियता से जुटे हुए हैं। चित्रकूट नगर क्षेत्र में कुल 6 सेवा केंद्रों के माध्यम से कार्य चल रहा है। रामघाट, सीतापुर, बेड़ी पुलिया एवं शंकर बाजार सहित विभिन्न स्थानों पर 360 स्वयंसेवक सेवा कार्य में लगे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र मानिकपुर में 3 सेवा केंद्रों पर 180 स्वयंसेवक राहत एवं सेवा कार्यों में सक्रिय हैं। प्रभावित परिवारों तक भोजन के पैकेट, पेयजल एवं आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है।
सामग्री के एकत्रीकरण एवं वितरण के लिए 10 टोलियां बनाई गई हैं, जबकि भोजन एवं अन्य आवश्यक सामग्री के निर्माण/तैयारी के कार्य में 12 टोलियां लगी हुई हैं। स्वयंसेवक समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। संकट की इस घड़ी में संघ के स्वयंसेवक सेवा, सहयोग और संवेदना के साथ बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच निरंतर सक्रिय हैं।



