कुटुंब का संस्कार युवा शक्ति का आधार
भारत की सभ्यता और संस्कृति परिवार-केंद्रित रही है। एक परिवार साथ रहने वाले व्यक्तियों की इकाई मात्र नहीं, बल्कि संस्कार, परंपरा, जिम्मेदारी, संवेदना और सामाजिक चेतना के निर्माण का पहला विद्यालय है। बदलते समय में शहरीकरण, तकनीकी विकास, सोशल मीडिया और वैश्वीकरण ने परिवार की संरचना और युवा पीढ़ी की जीवनशैली में व्यापक परिवर्तन किया है। ऐसे समय में ‘कुटुंब प्रबोधन’ जैसे संस्कार ने उत्तर प्रदेश के परिवारों को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध किया है। आज उत्तर प्रदेश के तमाम गांवों से लेकर शहरों तक युवा अपने परिवारों को जोड़कर रखने की कोशिश कर रहे हैं, जो सामाजिक परिवर्तन की दशा और दिशा तय करने में सक्षम हो रहा है।
राज्य सरकार परिवारों को पहचान देने, आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम और योजनाएं चला रही है। इसमें ‘परिवार आईडी-एक परिवार एक पहचान’ योजना प्रमुख है। राज्य के सभी परिवारों को एक विशिष्ट पहचान पत्र देने और डेटाबेस तैयार करने के लिए यह योजना शुरू की गई है, जिससे पात्र परिवारों को सीधा लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक परिवारों को आर्थिक मदद दी जाती है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत गरीब परिवार के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को 30,000 रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सरकार वित्तीय सहायता और आयोजन का प्रबंध करती है।
कुटुंब प्रबोधन का अर्थ परिवार को बचाए रखने या संयुक्त परिवार की पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक अर्थ परिवार के सदस्यों के बीच संवाद, परस्पर सम्मान, जिम्मेदारी, संवेदना और भारतीय जीवन-मूल्यों को मजबूत करना है। अधिकार के साथ कर्तव्य भी जुड़े होते हैं और व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी आवश्यक होता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से और जुड़ जाना होता है और यही कुटुंब प्रबोधन की मूल भावना है। यह कार्य उत्तर प्रदेश के युवा बखूबी कर रहे हैं और परिवार के साथ जीवन को एक नई दशा और दिशा दे रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य तो है ही, युवाओं की बड़ी आबादी भी इसी प्रदेश में रहती है। प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर और नोएडा जैसे शहर शिक्षा, रोजगार, उद्योग और तकनीक के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। गांवों से शहरों की ओर युवाओं का प्रवास बढ़ा है। डिजिटल माध्यमों ने दुनिया को युवाओं की मुट्ठी में ला दिया है। इससे अवसरों का विस्तार हुआ है, लेकिन इसके साथ सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
उत्तर प्रदेश का युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, स्टार्टअप शुरू कर रहा है, डिजिटल कंटेंट बना रहा है और देश-विदेश में शिक्षा तथा रोजगार के अवसर तलाश रहा है। वह तकनीक के माध्यम से नई दुनिया से जुड़ रहा है। यह परिवर्तन सकारात्मक है। साथ ही, अकेलापन, पारिवारिक संवाद में कमी, उपभोक्तावाद, तनाव, सोशल मीडिया की आभासी दुनिया और पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी जैसी समस्याएं भी दिखाई देती हैं। ऐसे में कुटुंब प्रबोधन युवाओं को आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करने का रास्ता दिखा रहा है।
युवा किसी भी समाज की ऊर्जा और भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझते हैं, तो वे केवल सफल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के युवा देश को एक नई राह दिखा रहे हैं। वे परिवार में संवाद की संस्कृति विकसित कर रहे हैं। माता-पिता और बच्चों के बीच पढ़ाई, नौकरी या करियर की चर्चा के साथ-साथ जीवन, समाज, संस्कृति, देश और भविष्य पर भी बातचीत कर रहे हैं। परिवार में भोजन के समय कुछ देर साथ बैठ रहे हैं, बुजुर्गों के अनुभव को सुन रहे हैं, त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये प्रयास बड़ा प्रभाव पैदा करते हैं।
उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना में परिवार की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यहां गांवों और कस्बों में आज भी रिश्तेदारी और सामाजिक संबंधों का मजबूत तंत्र मौजूद है। परिवारों में दादा-दादी और नाना-नानी की उपस्थिति बच्चों को अनुभव और परंपरा से जोड़ती है। लोकगीत, लोककला, त्योहार, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तथा स्थानीय परंपराएं युवा पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने का माध्यम बनती हैं। संस्कारों से ही सशक्त परिवार बनते हैं और ऐसे सशक्त परिवार मजबूत एवं संगठित समाज की नींव तैयार करते हैं। पारिवारिक जीवन में आपसी प्रेम, संवाद, विश्वास, सहयोग और अच्छे संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सुदृढ़ पारिवारिक व्यवस्था, स्वस्थ जीवनशैली, अच्छे संस्कार और आपसी सहयोग समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुटुंब प्रबोधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष पीढ़ियों के बीच संवाद है। युवा पीढ़ी डिजिटल तकनीक के साथ बड़ी हुई है, जबकि माता-पिता और बुजुर्गों का अनुभव अलग सामाजिक परिस्थितियों में निर्मित हुआ है। दोनों के बीच विचारों का अंतर स्वाभाविक है और उत्तर प्रदेश के युवा इस सामंजस्य को बिठाने में सफल हो रहे हैं। युवा बुजुर्गों के अनुभव का सम्मान कर रहे हैं और बुजुर्ग भी युवाओं की आकांक्षाओं तथा बदलती दुनिया को समझने का प्रयास कर रहे हैं। संवाद दोनों दिशाओं में हो रहा है और परिवार मजबूत बन रहा है।
महिलाओं की भूमिका भी कुटुंब प्रबोधन में केंद्रीय है। परिवार में समानता, सम्मान और अवसर का वातावरण युवाओं के व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। बेटियों को शिक्षा, निर्णय और करियर के समान अवसर देना तथा बेटों को घरेलू जिम्मेदारियों में सहभागी बनाना आवश्यक है, जिसे राज्य की सरकार बखूबी कर रही है। परिवार में लैंगिक समानता की भावना विकसित हो रही है और युवा पीढ़ी जिस परिवार को अपने जीवन में देखती है, उसी से वह समाज के प्रति अपने व्यवहार की सीख लेती है।
डिजिटल युग के कारण परिवार के सामने नई चुनौती भी है। एक ही कमरे में बैठे परिवार के सदस्य अलग-अलग स्क्रीन पर व्यस्त दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया ने संवाद को बढ़ाया है, लेकिन आमने-सामने की बातचीत को कम भी किया है। इसलिए डिजिटल अनुशासन आवश्यक है। परिवार में ‘स्क्रीन टाइम’ और ‘फैमिली टाइम’ के बीच संतुलन बनाया जाता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में युवाओं को डिजिटल माध्यमों का उपयोग ज्ञान, रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता के लिए करने के साथ-साथ फेक न्यूज, साइबर अपराध और डिजिटल लत से बचने के लिए जागरूक किया जाता है।
उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए कुटुंब प्रबोधन का एक और महत्वपूर्ण आयाम राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी है। परिवार से प्राप्त संस्कार व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार में दिखाई देते हैं। परिवार में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, बुजुर्गों का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता, ईमानदारी और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्य व्यवहार में उतर रहे हैं। परिवार सामाजिक परिवर्तन का सबसे छोटा, लेकिन सबसे प्रभावशाली केंद्र बन रहा है।
उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की भूमिका कुटुंब प्रबोधन में अहम हो चुकी है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में युवाओं में केवल रोजगारपरक कौशल ही नहीं, बल्कि जीवन-कौशल, नैतिकता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय और युवा संगठन परिवार, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी पर संवाद, कार्यशालाएं, सामुदायिक गतिविधियां और युवा नेतृत्व कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कुटुंब प्रबोधन का उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से शक्ति लेकर भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देना है। भारतीय परिवार की शक्ति उसके संबंधों की गुणवत्ता में है। आज संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार, मूल प्रश्न यह है कि उसमें प्रेम, विश्वास, संवाद और जिम्मेदारी कितनी है।
बहरहाल, उत्तर प्रदेश का युवा आज नए भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्टार्टअप से लेकर शोध, प्रशासन से लेकर पत्रकारिता, खेल से लेकर कला और तकनीक से लेकर उद्यमिता तक उसके सामने अनेक संभावनाएं हैं। उसकी आधुनिक प्रतिभा को परिवार से मिले संस्कार, सामाजिक संवेदना और राष्ट्रीय दृष्टि का साथ उसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाता है। उत्तर प्रदेश के युवाओं के संदर्भ में कुटुंब प्रबोधन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां का युवा विकसित भारत के साथ-साथ 2047 में परिवार, समाज और राष्ट्र का नेतृत्व करेगा। मजबूत परिवार से संवेदनशील युवा और संवेदनशील युवा से मजबूत समाज का निर्माण होता है। यही कुटुंब प्रबोधन की सार्थकता है और यही उत्तर प्रदेश के युवा की सबसे बड़ी शक्ति भी है।




