जबलपुर
राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जबलपुर में नारी शक्ति, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। समिति के नर्मदा भाग द्वारा ‘अभ्युदय पथ संचलन’ तथा कृषि भाग द्वारा ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’ का आयोजन किया गया।
कदमों में अनुशासन, चेहरे पर आत्मविश्वास और मन में राष्ट्रसेवा का संकल्प लिए सेविकाओं का समाजजनों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। नन्हीं बालिकाओं से लेकर वरिष्ठ सेविकाओं तक की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।
नर्मदा भाग: ‘अभ्युदय पथ संचलन’
नर्मदा भाग का संचलन मालवीय चौक स्थित अंजुमन इस्लामिया स्कूल से प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं प्रखर वक्ता स्वप्ना गुप्ता जी (निदेशक, एम.एम. इंटरनेशनल स्कूल, जबलपुर) उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता करुणा क्षत्रिय जी (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य, राष्ट्र सेविका समिति) ने विचार रखे।
करुणा क्षत्रिय ने कहा कि आद्य संचालिका वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर ने नारी शक्ति के निरंतर जागरण, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और राष्ट्र निर्माण का कार्य किया। मौसी जी द्वारा रोपा गया यह विचार आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी छाया में लाखों महिलाएं राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित हैं। वरिष्ठ सेविकाओं के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनका पथ कंटकमय था। अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने त्याग, तपस्या और परिश्रम से समिति के कार्य को आगे बढ़ाया। आज पथ संचलन में जो पुष्प वर्षा हो रही है, वह उन्हीं वरिष्ठ सेविकाओं के परिश्रम का परिणाम है। यह समाज द्वारा समिति के कार्य को मिल रहे स्नेह और सम्मान का प्रतीक है।
कृषि भाग: ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’
कृषि भाग का संचलन अधारताल स्थित धनी की कुटिया मैरिज गार्डन से हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. सखी वैश्य जी (कुलसचिव, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, अधारताल) रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेश्वरी कौरव जी (नगर पुलिस अधीक्षक, अधारताल, जबलपुर) उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता मनीषा चौहान जी (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य एवं विभाग बौद्धिक प्रमुख, सिवनी) ने सेविकाओं का मार्गदर्शन किया।
कृषि भाग में आयोजित ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’ में मनीषा चौहान ने कहा कि इस दीर्घ कालखंड में समिति ने केवल संगठन का विस्तार नहीं किया, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की एक सशक्त परंपरा खड़ी की है। नौ दशकों में कितनी ही सेविकाओं ने अपने जीवन को नई दिशा दी, कितने ही परिवारों में संस्कार पहुँचे और कितने ही लोगों में सेवा का भाव जागृत हुआ। उन्होंने कहा कि यदि इन 90 वर्षों को एक सूत्र में बाँधना हो, तो वह सूत्र होगा, “प्रभाव से परिवर्तन की ओर।” “यही राष्ट्र सेविका समिति की यात्रा है।” उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे इस विचार को आत्मसात कर अपने-अपने क्षेत्र में परिवर्तन की वाहक बनें और राष्ट्र निर्माण के इस महाअभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।



