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पंच परिवर्तन को व्यवहार में लाकर बिना संघ में आए भी स्वयंसेवक बन सकते हैं - मनमोहन वैद्य जी

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लद्दाख 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लेह, लद्दाख में “RSS@100: दृष्टि एवं ध्येय (विजन & मिशन) – समाज का संगठन, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में परम पूज्य पल्गा रिनपोछे जी तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी उपस्थित रहे। मंच पर पद्मश्री डॉ. पद्मा गुरमीत जी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रस्तावना प्रस्तुत कर अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया।

मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि संघ पिछले सौ वर्षों से भारत की भारतीय अवधारणा को नित्य शाखा में सहज खेल-खेल में ही सामान्य समाज के मन में बोने का कार्य कर रहा है। भारत के विषय में समाज में फैली विभिन्न भ्रांतियों को संघ के नजरिए से स्पष्ट किया। संघ के स्वयंसेवक अपने आचरण में संघ जीते हैं, हम सब भी संघ शताब्दी वर्ष में संघ के द्वारा चर्चा किए पंच परिवर्तन को अपने व्यवहार में लाकर बिना संघ में आए भी स्वयंसेवक बन सकते हैं। कार्यक्रम में कुल 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 170 पुरुष एवं 80 महिलाएँ शामिल रहीं।