पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड
जब सफेद चादर से ढंक जाते हैं पहाड़, तो गर्माहट लाती है एक परम्परा। उत्तराखण्ड के ऊँचे हिमालयी इलाकों में रहता है भोटिया समाज, जो है मेहनत, सादगी और आत्मनिर्भरता की मिसाल। यहां की महिलाएं केवल घर नहीं संभालतीं वे संस्कृति को भी सहेजती हैं। भोटिया महिलाओं द्वारा बुना गया पारम्परिक ऊनी कारपेट— जिसे स्थानीय भाषा में कहा जाता है ‘दन’। भेड़ों से निकली शुद्ध ऊन को साफ किया जाता है।
धागों में काता जाता है और फिर पारम्परिक करघों पर घंटों मेहनत से बुना जाता है। धैर्य, एकाग्रता और वर्षों का अनुभव, तभी तैयार होता है एक मजबूत और सुंदर ‘दन’। इन कारपेटों के डिजाइन पहाड़ों की कहानी कहती है- अनूठी आकृतियाँ, प्राकृतिक रंग और पीढ़ियों से चली आ रही पहचान। आज यह कारपेट भोटिया महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन हैं। स्थानीय बाजारों और हस्तशिल्प मेलों ने इस परम्परा को नई पहचान दी है और महिलाओं को आर्थिक ताकत। ‘दन’ कारपेट केवल ऊन से नहीं बने होते। उनमें बुनी होती है मेहनत, सम्मान और पहाड़ों की आत्मा।



