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समाज की शक्ति प्रत्येक वर्ग के सकारात्मक आचरण और आपसी समन्वय से निर्मित होती है – दत्तात्रेय होसबाले जी

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जमशेदपुर

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त जमशेदपुर प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने तीन समूहों में आयोजित बैठकों में सहभागिता की। पहली  सामाजिक सद्भाव बैठक में विभिन्न जाति-वर्गों के 375 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। संत महात्माओं के साथ आयोजित बैठक में 170 प्रतिनिधि उपस्थित रहे, इसी प्रकार विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के साथ आयोजित बैठक में 210 प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सामाजिक सद्भाव बैठक

विभिन्न जाति, समाजों के प्रतिनिधियों ने जाति भेद, छुआछूत, धर्मांतरण, घुसपैठ, बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार, नेपाल में वामपंथी संगठनों द्वारा हिन्दू समाज पर कुठाराघात, शिक्षा नीति, युवाओं में बढ़ती नशाखोरी, सांस्कृतिक प्रदूषण जैसे प्री-वेडिंग शूट और लिव इन रिलेशन आदि विषयों पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए गए। चर्चा में सरकार्यवाह जी ने कहा कि जैसे अंगों के मजबूत होने से ही शरीर मजबूत होता है, वैसे ही समाज की शक्ति प्रत्येक वर्ग के सकारात्मक आचरण और आपसी समन्वय से निर्मित होती है। अपने क्षेत्र विशेष में रहने वाले अन्य समाज के लोगों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। जिस प्रकार एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ अंग निवास कर सकता है। सरकार्यवाह जी ने विवेकानंद जी के संदर्भ को उद्धृत करते हुए कहा कि हिन्दू समाज से उन्होंने कहा था कि तुम सोचते बहुत हो, करके दिखाओ। अब केवल विचार नहीं, कर्म के माध्यम से समाज परिवर्तन का समय है।

संत-महात्मा बैठक

संत समाज के साथ बैठक में हिन्दू धर्म की रक्षा और नैतिकता ह्रास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। किन्नर अखाड़ा ने पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन में अश्लीलता का विरोध किया। कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ होने पर भी उनके परिवार द्वारा स्वीकार न करना भी, एक समस्या बताई। इस पर सरकार्यवाह जी ने हिन्दू समाज की तुलना एक वट वृक्ष के रूप में की, जिसकी जड़ें धर्म और नैतिकता में निहित हैं। जंजीर की ताकत हर कड़ी में होती है, इसलिए हर कड़ी को मजबूत बनाना है, जिसके बाद पूरा समाज मजबूत बन सकता है। संघ व्यक्ति और समाज को लेकर ही स्वस्थ समाज की स्थापना करना चाहता है। इसलिए स्वस्थ समाज की स्थापना चरित्रवान व्यक्ति और संगठित समाज द्वारा ही संभव है।

आध्यात्मिक संगठनों की बैठक

बैठक में वेब सीरीज,  ओटीटी, हलाल सर्टिफिकेट जैसी समस्याओं को प्रस्तुत किया गया। परम वैभव के मार्ग पर ले जाने हेतु व्यक्ति, परिवार और समाज स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन जैसे कार्यों को करने पर बल दिया गया। मनुष्य के चारों आयाम व्यक्ति आधारित धर्म, परिवार आधारित धर्म, व्यवसाय आधारित धर्म एवं समाज आधारित धर्म मिलकर ही राष्ट्र धर्म को बनाते हैं। भारत को परम वैभव को ले जाने की परिकल्पना में अपनी प्रार्थना पर बताया कि संघ की प्रार्थना उपदेशात्मक न होकर 'मैं' या स्वयं आधारित करणीय विषयों पर ही जोर देती है। हमारे कार्यों के सामूहिक प्रयास से ही सब कुछ यशस्वी हो सकता है।

नैतिक मूल्यों की रक्षा तथा व्यक्ति, परिवार और समाज स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन द्वारा राष्ट्र को परम वैभव की दिशा में ले जाने पर बल दिया। संघ की प्रार्थना को आत्मचिंतन एवं कर्तव्यबोध का माध्यम बताया।

कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। जूना अखाड़ा, किन्नर अखाड़ा, भारत सेवाश्रम संघ, इस्कॉन, गायत्री परिवार सहित समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।