नई दिल्ली
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के नव-निर्मित ‘विद्या भारती भवन’ का लोकार्पण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी जी ने किया। कार्यक्रम में पूज्या आनंदमूर्ति गुरु माँ सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मूल्य आधारित, मातृभाषा-आधारित, तकनीक-सक्षम एवं कौशलपरक शिक्षा के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में विद्या भारती की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि आज समाज में विद्या भारती एक प्रखर, जीवंत और सफल प्रयोग है। विद्या भारती ने समय की आवश्यकता को समझते हुए स्वयं को निरंतर परिवर्तित किया है। भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने मूल्य-आधारित शिक्षा के साथ-साथ कौशल-आधारित, तकनीक-सक्षम और नवाचार केंद्रित पाठ्यक्रमों को अपनाया है, जिससे विद्यार्थी बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को सक्षम बना सकें। साथ ही, प्रारंभ से ही मातृभाषा में शिक्षा को महत्व दिया है, यह मानते हुए कि बालक की प्रारंभिक समझ, चिंतन और सृजनात्मकता अपनी भाषा में ही सर्वाधिक प्रभावी रूप से विकसित होती है। आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी मातृभाषा-आधारित शिक्षण पर दिया गया बल, इस दूरदर्शी दृष्टिकोण की पुष्टि करता है। जिस प्रकार श्री राम मंदिर राष्ट्र को दिशा प्रदान करता है, उसी प्रकार ‘विद्या भारती’ शिक्षा के क्षेत्र में एक मार्गदर्शक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
सुरेश सोनी जी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि संवेदनशील और राष्ट्र समर्पित व्यक्तित्व का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
महामंत्री देशराज शर्मा ने बताया कि विद्या भारती आज देश के सबसे बड़े गैर-सरकारी शैक्षिक संगठनों में से एक है, जो 684 जिलों में 24,000 से अधिक विद्यालयों, 59 महाविद्यालयों और 2 विश्वविद्यालयों के माध्यम से लगभग 33 लाख छात्रों तक शिक्षा पहुंचा रहा है। इसके अतिरिक्त, सेवा बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों एकल विद्यालयों के जरिए शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है।



