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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व पर व्याख्यान का आयोजन

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भोपाल

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से ज्ञान विज्ञान भवन, विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप मंत्र से हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों ने राष्ट्रगीत “वंदेमातरम्” का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया।


अतिथियों के परिचय क्रम में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक धीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह का परिचय दिया। राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय राहुल सिंह परिहार ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश प्रदेश शासन का परिचय दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार जैन ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम की प्रासंगिकता एवं विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार जी ने कहा कि विज्ञान एक सार्वलौकिक विषय है, किंतु आज विज्ञान और तकनीक नई समस्याएँ भी उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि आज एआई कविता लिख सकता है, कालिदास के नाम से श्लोक रच सकता है और आने वाले समय में मतदान जैसे निर्णयों को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है और भविष्य में युद्ध भी तकनीक के माध्यम से लड़े जा सकते हैं, जिससे मानव समाज एक खतरनाक दौर की ओर बढ़ रहा है। विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि उसका सांस्कृतिक और सभ्यतागत पक्ष भी है, और आधुनिक तकनीकी समस्याओं का समाधान भारतीय विज्ञान दृष्टि में निहित है। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया।

मुख्य अतिथि इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भारत को कमतर आंकने का प्रयास किया गया और भारतीय समाज की वैज्ञानिक उपलब्धियों को छुपाया गया। आज भारतीय वैज्ञानिक विरासत को पुनः सामने लाने की आवश्यकता हैl

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. एस. बी. सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सरोजनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल में “भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत का संकल्प @2047” विषय पर ‘विमर्श एवं संवाद’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह मुख्य वक्ता रहे। इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों से आए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रमुखों के साथ विचार साझा किए। नंदकुमार जी ने कहा कि जब तक भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान और पुनर्स्थापन नहीं होगा, तब तक विकसित भारत का संकल्प अधूरा रहेगा। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत को सांस्कृतिक चेतना के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बनना होगा।