श्री राम जन्मभूमि मंदिर के साक्ष्य जुटाने वाले डॉ. बुद्ध रश्मि मणि पद्मश्री से सम्मानित
भारतीय पुरातत्व और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान देश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, पुरातात्विक अनुसंधान में योगदान के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को विशेष पहचान अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर प्रकरण में मिली। वर्ष 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर उनके नेतृत्व में विवादित स्थल पर उत्खनन कराया गया था। उत्खनन में प्राप्त उत्तर भारतीय नागर शैली के अवशेष, स्तंभों के अधिष्ठान और अन्य पुरातात्विक साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुए थे और उन्हीं साक्ष्यों ने आगे चलकर भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान के पूर्व कुलपति और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक रह चुके डॉ. मणि ने देशभर के 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन कार्य का नेतृत्व किया है। दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा व सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर उनके निर्देशन में महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं।
वर्तमान में डॉ. मणि भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा में पुरातत्व विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इससे पूर्व उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड (2017), शारदा शताब्दी सम्मान (2023) और भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज द्वारा मंजू श्री सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार/सम्मान दिए जा चुके हैं।
डॉ. बुद्ध रश्मि मणि का योगदान भारतीय संस्कृति और विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में प्रेरणास्रोत है।



