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ग्रेटर नोएडा के गोपाल पार्क में आयोजित हुआ हिन्दू सम्मेलन

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ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश

हिन्दू धर्म, संस्कृति और समाज की एकता, परस्पर प्रेम, सहयोग और स्वाभिमान के संरक्षण के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा में एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने परिवार सहित सहभागिता की और सामाजिक एकता का संदेश दिया। यह कार्यक्रम माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, विक्रम संवत् 2082, दिनांक 1 फरवरी, रविवार को UPSIDC साइट-C, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा स्थित गोपाल पार्क में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।


कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख (उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड) श्रीमान कृपाशंकर जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लगभग सौ वर्ष पूर्व डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने जिस संगठित और जागरूक हिन्दू समाज की कल्पना की थी, वह आज साकार होती दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि आज देशभर में दस हजार की आबादी पर हिन्दू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं और कई स्थानों पर दो-तीन गाँव मिलकर बड़े स्तर पर ऐसे आयोजन कर रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि डॉ. हेडगेवार जी द्वारा उठाए गए विषयों को लेकर आज हिन्दू समाज संगठित होकर खड़ा है।


कृपाशंकर जी ने संघ के पूर्व सरसंघचालक रज्जू भैया का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि देश का वास्तविक विकास गाँवों के माध्यम से होकर जाता है। साथ ही उन्होंने संघ के पाँचवें सरसंघचालक श्री के.एस. सुदर्शन जी का स्मरण करते हुए कहा कि भारत अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर पहले भी विश्व गुरु बना था और आगे भी अपनी ही शक्ति से पुनः विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भले ही धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हो, लेकिन समाज निरंतर एक-एक कदम आगे बढ़ रहा है।

इस सम्मेलन में परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री रुपेन्द्र प्रकाश जी महाराज भी विशेष रूप से शामिल हुए। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज सदियों से अपने शौर्य और स्वाभिमान के साथ जीता आ रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि हिन्दू समाज को समय-समय पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, फिर भी उसका अस्तित्व निरंतर बना रहा है। साथ ही अनेक कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद इस धर्म ने समाज और राष्ट्र को सदैव दिशा देने का कार्य किया है। यह भव्य हिन्दू सम्मेलन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ