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जेल में श्रीमद्भागवत कथा से कैदियों के जीवन में बदलाव की पहल

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हरिद्वार, उत्तराखण्ड

कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें सही राह दिखाने के उद्देश्य से रोशनाबाद स्थित जिला कारागार में एक विशेष आध्यात्मिक पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिससे बंदियों में अच्छे संस्कार और नई सोच विकसित हो सके।

जी हां, रोशनाबाद स्थित जिला कारागार में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन शुरू हो गया है। कथा शुरू होने से पहले जेल परिसर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य और कई बंदियों ने भाग लिया। इसके बाद विधिवत व्यास पूजन किया गया। यह कथा चैत्र नवरात्र के पहले दिन से शुरू हुई है, जो सात दिनों तक चलेगी। इस दौरान बंदी नियमित रूप से कथा सुनेंगे। कथा का वाचन कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री द्वारा किया जा रहा है, जो अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म, आस्था और सदाचार का संदेश दे रहे हैं।


इस आयोजन का संचालन श्री अखंड परशुराम अखाड़े द्वारा किया जा रहा है। जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने बताया कि ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों से बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि कारागार का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों का सुधार और पुनर्वास करना भी है। कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति को सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वहीं अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि इस तरह के आयोजन बंदियों में नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं और उन्हें समाज में वापस बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।